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Allegations of multi-crore financial irregularities in Siddhivinayak Temple offerings; demand raised for a two-year audit.
मुंबई। मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। करीब 18 करोड़ रुपये के दान में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और पिछले दो वर्षों के ऑडिट की मांग तेज हो गई है।
पूरे मामले की शुरुआत 20 मार्च को दादर थाने में दर्ज 10 हजार रुपये की चोरी की एफआईआर से हुई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में मंदिर के कुछ कर्मचारी लगातार कई दिनों तक दान पेटी से नकदी निकालते दिखाई दिए। इसके बाद कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राजेंद्र पेंडुरकर समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं 45 कर्मचारियों को निलंबित कर उनसे पूछताछ की जा रही है।
मामले से जुड़े आरोपों के अनुसार कार्रवाई से पहले मंदिर में हर सप्ताह लगभग 40 से 50 लाख रुपये का दान दर्ज होता था। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह राशि बढ़कर 80 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये प्रति सप्ताह तक पहुंच गई। इसी अंतर के आधार पर अनुमान लगाया गया कि सालभर में करीब 18 करोड़ रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई हो सकती है।
मनसे के प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने मंदिर प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने बताया कि प्रत्येक बुधवार को दान की गणना के बाद राशि बैंक में जमा कराई जाती है। उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराते हुए पिछले दो वर्षों के ऑडिट की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के न्याय विभाग ने सिद्धिविनायक ट्रस्ट से वित्तीय रिपोर्ट तलब की है। साथ ही ट्रस्ट के दो अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूरे मामले में जवाब मांगा गया है। अब जांच एजेंसियां दान संग्रह और जमा प्रक्रिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड की विस्तार से जांच कर रही हैं।