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Amidst the terror of a tiger, the Forest Department has stepped in to support children, taking on the responsibility of escorting them to school in villages bordering the forest.
राजनांदगांव। राजनांदगांव मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के औंधी-नवागांव उपवन क्षेत्र में बाघ की लगातार मौजूदगी ने जंगल से लगे गांवों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। करीब नौ दिन बाद फिर बाघ की दहाड़ सुनाई देने और लगातार गतिविधियां सामने आने के बाद वन विभाग ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें स्कूल तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की है।यह इलाका बस्तर और महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ है। वन विभाग के अनुसार क्षेत्र में करीब डेढ़ साल से बाघ की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। अगस्त महीने में करीब तीन साल का नर बाघ भी दोबारा इस इलाके में लौटने की पुष्टि हुई थी।
कुछ दिन पहले बाघ ने कोहकाटोला क्षेत्र में एक बैल का शिकार किया था। इसके बाद जंगल में उसकी मौजूदगी और बढ़ गई। सोमवार को बाघ ने जंगल से लगे इलाके में फिर एक बैल को अपना शिकार बनाया, जबकि मंगलवार को दो चरवाहों पर भी बाघ ने हमला किया। घटना के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया।चार किलोमीटर तक जंगल की ओर आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने उन्हें स्कूल पहुंचाने का फैसला किया है।
बुधवार सुबह से बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने की व्यवस्था शुरू की गई। वन विभाग ने किराये पर निजी वाहन लेकर ग्राम घोटिया कन्हार के आठ बच्चों को स्कूल पहुंचाया। इनमें से पांच बच्चे मिडिल स्कूल में पढ़ते हैं।पहले दिन सुबह वाहन बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचा और शाम को उन्हें वापस गांव छोड़ने की व्यवस्था की गई। वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रवीण देहरी की निगरानी में यह पूरी व्यवस्था संचालित की जा रही है।
वन विभाग की टीम जंगल से लगे इलाकों में बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और अकेले जंगल की ओर नहीं जाने की सलाह दी गई है।विभागीय जानकारी के अनुसार 7 अगस्त को कैमरे में कैद हुई बाघ की तस्वीर से उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 27 से 28 अगस्त के बीच घोटिया कन्हार, हालोपावली और पटटेयापाली के आसपास भी बाघ दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों के बीच डर और बढ़ गया।7 सितंबर को सामने आई तस्वीर में करीब डेढ़ वर्ष की मादा बाघिन की पहचान हुई है। इससे पहले कोहकाटोला क्षेत्र में दिखाई दिया बाघ महाराष्ट्र की ओर लौट चुका था। अब बाघ की नई गतिविधियों के बाद विभाग ने निगरानी और सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए हैं।
वन विभाग का कहना है कि जब तक क्षेत्र में बाघ की गतिविधियां सामान्य नहीं होतीं, तब तक संवेदनशील गांवों से स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन सुविधा जारी रखी जाएगी। विभाग का उद्देश्य बच्चों को जंगल और बाघ प्रभावित रास्तों से पैदल गुजरने के जोखिम से बचाना है।