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Anger erupted in 68 villages! Government offices were locked, employees were held hostage, and the administration was left red-faced.
कांकेर। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा में विकासखंड मुख्यालय से जुड़े सरकारी कार्यालयों को वापस लाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को उग्र रूप ले बैठा। सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले 68 गांवों के ग्रामीणों ने जनपद पंचायत, कृषि विभाग और बीईओ कार्यालय में घुसकर ताला जड़ दिया। इस दौरान कई कर्मचारी कार्यालयों के भीतर ही फंस गए और कुछ समय तक बंधक जैसी स्थिति बनी रही।
साप्ताहिक बाजार के दिन हजारों ग्रामीण पहुंचे
आंदोलन का तीसरा दिन होने के बावजूद प्रशासन की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कोयलीबेड़ा पहुंचे। साप्ताहिक बाजार के दिन प्रदर्शन को और व्यापक बनाया गया। 18 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने बाजार बंद कर आंदोलन को समर्थन दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया।
पुलिस और प्रशासन की समझाइश भी नहीं आई काम
प्रशासन की ओर से एडीएम ए.एस. पैकरा समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब एक घंटे तक आंदोलनकारियों और अधिकारियों के बीच बातचीत चली, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। नाराज ग्रामीणों ने कार्यालयों की चाबियां प्रशासन को सौंपते हुए स्पष्ट कहा कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि दफ्तरों की वास्तविक वापसी चाहिए।
बाद में अधिकारियों ने ताला खुलवाकर अंदर फंसे कर्मचारियों को बाहर निकाला, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने दोबारा ताला जड़ दिया। स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अमला मौके से लौट गया।
20 वर्षों से जारी है संघर्ष
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय नेताओं का कहना है कि 1997-98 में नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने का हवाला देकर कई सरकारी कार्यालयों को कोयलीबेड़ा से पखांजूर स्थानांतरित कर दिया गया था। तब से क्षेत्र के लोग लगातार इन्हें वापस लाने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि समय-समय पर सप्ताह में कुछ दिन कार्यालय संचालित करने के आदेश जारी किए गए, लेकिन अधिकारी नियमित रूप से नहीं पहुंचे। इसी वजह से अब ग्रामीण किसी लिखित आश्वासन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।
सिर्फ दफ्तर नहीं, कई और मांगें भी शामिल
आंदोलनकारी केवल कार्यालयों की वापसी ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई अन्य मांगें भी उठा रहे हैं। इनमें शामिल हैं,
- जनपद पंचायत और अन्य विभागों में नियमित अधिकारियों की नियुक्ति
- स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय को कोयलीबेड़ा में संचालित करना
- जिला सहकारी बैंक की शाखा खोलना
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना
- सरकारी संस्थानों के लिए आवश्यक भवन और संसाधनों की व्यवस्था
प्रशासन बोला- जनप्रतिनिधियों के साथ निकाला जाएगा समाधान
अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया है कि क्षेत्र के विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक कार्यालयों की वास्तविक वापसी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
क्षेत्र में बढ़ सकता है प्रशासनिक संकट
लगातार चक्काजाम, सरकारी कार्यालयों में ताला और बढ़ते जनआक्रोश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे क्षेत्रीय प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।