

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

As the layers of the paper leak were peeled back, a shocking scheme came to light... preparations are now underway for major changes to the agricultural university's examination system.
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में लगातार दो परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कीटशास्त्र के बाद अब बीएससी प्रथम वर्ष की पैथोलॉजी एटीकेटी परीक्षा का प्रश्नपत्र भी कथित तौर पर लीक होने की पुष्टि हुई है। मामले में तेलीबांधा पुलिस ने सहायक प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज की है। इस प्रकरण में मोहम्मद सोमान नामक छात्र को भी आरोपी बनाया गया है।पुलिस के अनुसार, सोमान ने कथित तौर पर प्रोफेसर से 10 हजार रुपए देकर प्रश्नपत्र खरीदा था। मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 7 अगस्त को आयोजित पैथोलॉजी परीक्षा रद्द कर दी है। अब यह परीक्षा नए सिरे से कराई जाएगी।
डीसीपी तारकेश्वर पटेल के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी सहायक प्रोफेसर ने कथित तौर पर बताया कि उसने 7 अगस्त को होने वाली बीएससी एग्रीकल्चर प्रथम वर्ष की परीक्षा का प्रश्नपत्र स्ट्रांग रूम से निकाला था।आरोप है कि 6 अगस्त को उसने सीलबंद लिफाफे को बाहर निकालकर प्रश्नपत्र का वीडियो बनाया। इसके बाद यह प्रश्नपत्र मोहम्मद सोमान और अजय नायक को 10 हजार रुपए में दिया गया।जांच में यह भी सामने आया कि प्रोफेसर ने पहले यह मान लिया था कि दोनों छात्र प्रश्नपत्र को आगे साझा नहीं करेंगे। जब पहली परीक्षा का प्रश्नपत्र वायरल नहीं हुआ तो उसका भरोसा बढ़ गया। इसके बाद 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र की परीक्षा का प्रश्नपत्र भी कथित तौर पर लीक कर अजय नायक को दिया गया। बाद में यह प्रश्नपत्र दूसरे छात्रों तक पहुंचा और वायरल हो गया।
प्रश्नपत्र लीक की घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय से जुड़े 28 सरकारी और चार निजी कॉलेजों में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सिरे से दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।प्रशासन अब प्रश्नपत्रों को स्ट्रांग रूम में रखने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और वितरण की पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय स्तर पर सख्त नियम लागू करने की बात कही गई है, ताकि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किसी बाहरी व्यक्ति तक न पहुंच सके।
पुलिस पूछताछ में प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ने कथित तौर पर आर्थिक परेशानी को प्रश्नपत्र लीक करने की वजह बताया है। मूल रूप से जबलपुर के रहने वाले सोनकेसरिया पिछले करीब एक वर्ष से भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में अध्यापन कर रहे थे।बताया गया है कि वह फूड इंजीनियर हैं और एमटेक की पढ़ाई कर चुके हैं। पूछताछ में उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्चे के इलाज का हवाला देते हुए अतिरिक्त आमदनी के लिए प्रश्नपत्र बेचने की बात स्वीकार की है। पुलिस अब उसके दावों के साथ-साथ इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के ताजा मामले ने राज्य में परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। पिछले वर्षों में भी छत्तीसगढ़ में विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आते रहे हैं।2022 के पीएससी प्रश्नपत्र मामले में भी जांच और कानूनी कार्रवाई लंबे समय से चर्चा में रही है। वहीं, छत्तीसगढ़ पीएमटी प्रश्नपत्र लीक मामले में भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, लेकिन बाद में कई आरोपी अदालत से बरी हो गए।
पीएमटी मामले में बेदीराम और दीनाराम समेत कई आरोपियों पर प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप लगे थे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मामले में आरोपियों को अभ्यर्थियों से बड़ी रकम लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और परीक्षा से पहले पेपर हल कराने जैसे आरोपों का सामना करना पड़ा था। बाद की न्यायिक प्रक्रिया में कुछ आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गए।इन्हीं पुराने मामलों और विश्वविद्यालय में सामने आए ताजा घटनाक्रम के बीच परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर कठोर व्यवस्था की मांग तेज हो गई है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि स्ट्रांग रूम जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली व्यवस्था से प्रश्नपत्र बाहर न निकलें और परीक्षा से पहले किसी भी स्तर पर उनकी गोपनीयता भंग न हो।