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BCI reverses decision on NALSAR's 2026 batch... stay on enrollment lifted following protests.
नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के कानून स्नातकों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर लगाई गई रोक कुछ ही समय बाद वापस ले ली। प्रारंभिक आदेश के खिलाफ सोशल मीडिया और कानूनी समुदाय में विरोध के बाद परिषद ने संशोधित आदेश जारी करते हुए छात्रों को राहत दी।
बीसीआई ने पहले सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि अगले आदेश तक नालसार के 2026 बैच के किसी भी छात्र का अधिवक्ता के रूप में नामांकन न किया जाए। हालांकि, व्यापक प्रतिक्रिया मिलने के बाद परिषद ने अपना निर्णय संशोधित करते हुए स्पष्ट किया कि 2026 बैच के सभी छात्र अपनी पसंद की राज्य बार काउंसिल में सामान्य प्रक्रिया के तहत नामांकन करा सकेंगे।
यह विवाद नालसार विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों द्वारा चलाए जा रहे उस अभियान से जुड़ा है, जिसमें विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित नहीं करने की मांग की गई थी।बीसीआई का कहना है कि उसने इस अभियान से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी का संज्ञान लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू की है।
बार काउंसिल ने नालसार विश्वविद्यालय के कुलपति को तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में निम्न बिंदुओं की जानकारी मांगी गई है:अभियान शुरू करने और उसका संचालन करने वाले लोगों की पहचान।अभियान के मसौदे, प्रचार और समन्वय में शामिल व्यक्तियों का विवरण।छात्र संगठनों, छात्र परिषदों और अन्य समूहों की भूमिका।किसी शिक्षक, शोधार्थी, पूर्व छात्र या बाहरी व्यक्ति की संभावित भागीदारी।इस मुद्दे से जुड़ी बैठकों के प्रस्ताव, कार्यवृत्त और अन्य आधिकारिक दस्तावेज। क्या विरोध प्रदर्शन के लिए विश्वविद्यालय से अनुमति ली गई थी और क्या छात्र आचार संहिता के तहत कोई कार्रवाई की गई।
बीसीआई के शुरुआती आदेश की कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई। इसके बाद बीसीआई ने स्पष्ट किया कि अधिकांश छात्रों की इस विवाद में कोई भूमिका नहीं थी, इसलिए पूरे बैच के नामांकन पर रोक उचित नहीं होगी।फिलहाल, छात्रों के नामांकन पर कोई रोक नहीं है, जबकि विश्वविद्यालय से मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर बीसीआई आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।