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BJP gears up for next year's political test... special emphasis on strengthening the organization and expanding outreach to the youth.
नई दिल्ली। अगले साल होने वाले सात विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने संगठनात्मक तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने चुनावी राज्यों में जमीनी पकड़ मजबूत करने, युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने और जनता से सीधे संपर्क को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्षों और प्रदेश संगठन महासचिवों के साथ संबंधित राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की स्थिति और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया गया।
इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ पांच घंटे से अधिक समय तक बैठक की। बताया गया कि प्रधानमंत्री ने सभी 65 नए पदाधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की और संगठन को मजबूत करने के लिए जरूरी सुझाव दिए।बैठक के दौरान नए पदाधिकारियों को युवाओं के बीच सक्रियता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर लोगों से लगातार संवाद बनाए रखने का संदेश दिया गया। पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर रहा कि संगठन केवल चुनाव के दौरान सक्रिय रहने के बजाय पूरे समय जनता के बीच मौजूद रहे।
अगले साल पंजाब, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड, गोवा, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें पंजाब और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी पांच राज्यों में फिलहाल भाजपा की सरकार है।बैठकों में इन सभी राज्यों के राजनीतिक समीकरण, संगठन की तैयारियां, स्थानीय मुद्दे और जनहित से जुड़े अभियानों की समीक्षा की गई। चुनावी राज्यों में पार्टी की पहुंच को बूथ और गांव स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने नए पदाधिकारियों को युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने और संगठन की गतिविधियों को जमीनी स्तर तक ले जाने की आवश्यकता बताई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि युवा वर्ग से निरंतर संपर्क और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।बैठक के बाद नितिन नवीन ने भी संगठनात्मक मामलों पर हुई चर्चा की जानकारी साझा की। पार्टी की आगामी रणनीति में कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जनता के बीच निरंतर संपर्क और चुनावी राज्यों में संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।