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Bastar is shifting from an identity defined by Naxal violence towards a national model of development; 'Vision 2031' and 'Bastar 2.0' are set to transform the landscape.
रायपुर। कभी नक्सल हिंसा और अशांति की पहचान से जुड़े बस्तर को अब विकास, समृद्धि और आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही हैं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा प्रस्तुत "विजन 2031" और "बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट" के माध्यम से बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, पर्यटन और जनजातीय सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह विकास योजना आने वाले वर्षों में बस्तर की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली मानी जा रही है।
बस्तर में विकास के नए युग की शुरुआत
हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर क्षेत्र में संचालित विभिन्न विकास अभियानों और योजनाओं की जानकारी साझा की थी। इनमें मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान, अग्रणी बस्तर अभियान तथा हितग्राहियों को विभिन्न लाभकारी योजनाओं के कार्ड वितरण सहित कई महत्वपूर्ण पहल शामिल थीं।

इसके बाद अमित शाह ने 18 और 19 मई को बस्तर का दो दिवसीय दौरा कर क्षेत्र की सुरक्षा, विकास और नक्सलवाद उन्मूलन के बाद की परिस्थितियों की समीक्षा की। जगदलपुर में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों में नक्सलवाद समाप्ति के बाद की विकास रणनीति, बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के विस्तार पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर बस्तर के लिए एक दीर्घकालिक विकास मॉडल पर सहमति बनाई।
विकसित बस्तर का संकल्प दोहराया
जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है। अब अगले पांच वर्षों में "सुरक्षा से विश्वास, विश्वास से विकास, विकास से समृद्धि और समृद्धि से संतृप्ति" तक की यात्रा पूरी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बस्तर के लोगों की औसत आय छह गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। हजारों लोगों की उपस्थिति में अमित शाह ने संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि अगले चार से पांच वर्षों में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा।
नक्सलवाद से विकास की मुख्यधारा तक
अमित शाह ने बताया कि जनवरी 2024 में रायपुर में हुई समन्वय बैठक में 31 मार्च 2026 तक देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब दशकों पुरानी हिंसा के समाप्त होने पर विश्वास करना कठिन था, लेकिन सुरक्षा बलों की रणनीति, साहस और समर्पण ने यह संभव कर दिखाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी संगठनों ने वर्षों तक बस्तर को विकास की मुख्यधारा से दूर रखा और सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सरकारी योजनाओं के विस्तार में बाधाएं उत्पन्न कीं, जिससे क्षेत्र का समग्र विकास प्रभावित हुआ।
शहीद जवानों को श्रद्धांजलि, सेवा डेरा मॉडल बनेगा बदलाव का माध्यम
केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए सुरक्षा बलों के जवानों और उनके परिवारों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नक्सलमुक्त भारत का वास्तविक श्रेय इन्हीं वीर जवानों को जाता है।
उन्होंने बताया कि बस्तर में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा कैंपों में से एक-तिहाई को "वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा" के रूप में विकसित किया जाएगा। इन सेवा डेरों के माध्यम से सरकार गांवों तक सीधे पहुंचकर प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ उपलब्ध कराएगी।
आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने की व्यापक योजना
अमित शाह ने कहा कि अगले छह महीनों में बस्तर को सहकारी डेयरी नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है। इसके लिए आदिवासी महिलाओं को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि वन उपज और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत कर उसका अधिकतम लाभ सीधे आदिवासी परिवारों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों की मनोवैज्ञानिक मैपिंग, कौशल विकास प्रशिक्षण और शिक्षा के माध्यम से उन्हें सम्मानजनक जीवन और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम बने सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक
बस्तर में सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण के लिए आयोजित बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को अमित शाह ने महत्वपूर्ण बताया।

बस्तर ओलंपिक में लगभग 1.65 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया। सात जिलों और 32 विकासखंडों में आयोजित इस अभियान ने युवाओं को खेल, नेतृत्व और सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने का कार्य किया। इसमें पारंपरिक जनजातीय खेलों को भी शामिल किया गया।
वहीं बस्तर पंडुम महोत्सव में करीब 47 हजार कलाकारों, 1,885 ग्राम पंचायतों और 1,743 सांस्कृतिक दलों ने भाग लेकर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया। सरकार इसे पर्यटन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण माध्यम मान रही है।
नियद नेल्लानार योजना से गांवों तक पहुंच रहा विकास
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की महत्वाकांक्षी "नियद नेल्लानार योजना" को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का प्रमुख आधार माना जा रहा है। दंडामी बोली में "नियद नेल्लानार" का अर्थ है – "आपका अच्छा गांव"।
15-16 फरवरी 2024 को शुरू हुई इस योजना के तहत नए सुरक्षा शिविरों के पांच किलोमीटर दायरे में स्थित गांवों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में 14 नए सुरक्षा शिविरों के आसपास के गांवों को शामिल किया गया है।

योजना के अंतर्गत 25 से अधिक बुनियादी सुविधाएं और 32 से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने अतिरिक्त 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
ग्रामीणों को राशन कार्ड, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, बिजली, सिंचाई पंप, वनाधिकार पत्र, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल, बैंकिंग सेवाएं, मोबाइल टावर और सर्व-ऋतु सड़क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट से बदलेगी आधारभूत संरचना
विजन 2031 के तहत तैयार किए गए बस्तर 2.0 ब्लूप्रिंट में आधारभूत संरचना विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकार की योजना है कि वर्ष 2027 तक लंबित ग्रामीण आधारभूत संरचना परियोजनाओं को पूर्ण कर लिया जाए। इसके अलावा जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, रावघाट-जगदलपुर रेललाइन परियोजना, स्वास्थ्य संस्थानों का उन्नयन तथा आधुनिक शैक्षणिक परिसरों का विकास भी इस ब्लूप्रिंट का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
2031 तक विकसित बस्तर का लक्ष्य
केंद्र और राज्य सरकार का मानना है कि शांति और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी सोच के साथ मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन और वर्ष 2031 तक बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, मोबाइल नेटवर्क, पर्यटन, खेल, संस्कृति, कृषि और उद्यमिता को विकास की आधारशिला बनाकर तैयार किया गया यह विजन केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर को एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त आदिवासी क्षेत्र के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करने का व्यापक प्रयास है।