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Special Story: Chief Minister Vishnudeo Sai is gentle, simple, but does not fail when necessary
सौम्यता और सरलता किसी व्यक्ति के गुण हो सकते हैं लेकिन इन गुणों की सही पहचान तब होती है जब किसी व्यक्ति को पद और पॉवर मिले उस स्थिति में भी वह उसी सौम्यता और सरलता के साथ लोगों से वैसा ही व्यवहार करे जैसा कि वह वर्षों से करता रहा है। यही गुण विष्णुदेव साय को बाकी लोगों से अलग बनाता है। उनका करीब 35 से ज्यादा वर्षों का राजनीतिक जीवन निष्कंलक रहा है। यही बड़ी वजह थी कि मध्यभारत में आदिवासी बाहुल्य में सबसे बड़े नेता के रुप में उनका उभार हुआ। विश्व के सबसे बड़े नेता नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ की कमान सौंपीं। स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जैसे राष्ट्रीय पटल के दिग्गज नेता के साथ निकट सहयोगी के रुप में काम करने वाले विष्णुदेव साय की सरलता, सहजता और सौम्यता उनके सबसे बड़े आभूषण हैं। उस पर जमीनी समझ और समय आने पर कड़े और कठोर निर्णय लेने में तत्परता उन्हें सबसे अनूठा बनाती है। पंच से लेकर विधायक और सांसद फिर केन्द्र में मंत्री रहे साय मध्यप्रदेश विधानसभा में भी दो बार चुनकर जा चुके हैं और लोकसभा में 4 बार चुने गए हैं। विष्णुदेव साय को विधायिका से लेकर सरकार औऱ संगठन में लगातार काम करने का अनुभव है। छत्तीसगढ़ गठन के बाद दो-दो बार प्रदेश अध्यक्ष के रुप में काम करके अपनी अलग छाप छोड़ी है।

श्री साय ने मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बाद वर्ष 2018 से 2023 तक छत्तीसगढ़ की जिन घोटालों, घपलों और वसूली के लिए देशभर में बदनामी हो रही थी उन पर ना सिर्फ तत्परता से निर्णय लेकर कड़ा संदेश दिया बल्कि जरुरत पड़ने पर ऐसे सभी मामलों की जांच केन्द्रीय एजेन्सियों से कराने से भी नहीं चूके। सत्ता में आने के बाद शिक्षा विभाग में विद्यार्थियों को हो रही परेशानियों, उनसे मजदूरों की तरह काम कराने के मामले हों या फिर जिले का रिजल्ट खराब होने की शिकायतों पर तीन-तीन जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों के तबादले और फिऱ निलम्बन जैसे कार्रवाईयां करके स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी सौम्यता और सरलता तभी तक है जब तक शासन-प्रशासन संवेदनशीलता और जबावदेही से काम करे, यदि काम में चूक और लापरवाही पर ध्यान नहीं दिया जायेगा तो कठोर एक्शन जरुर होगा।

पहली एसपी-कलेक्टर कॉन्फ्रेन्स में समय से पहले पहुंचकर और सबके साथ लंच करके सुबह से शाम तक मीटिंग लेकर अनुशासन और समय का पाठ ब्यूरोकेसी को पढ़ा दिया था। मीटिंग में पूरी तैयारी से पहुंचे सीएम ने एक-एक एसपी और कलेक्टर की कमजोरी और कमी के साथ अच्छे कामों की तारीफ करके साफ संदेश दिया कि उन्हें जमीनी हकीकत और जिलों के हालातों की वास्तविक जानकारी है। पिछले एक साल के पुलिस और ब्यूरोकेसी के फेरबदल करके उन्होंने सिद्ध किया कि कुशल सवार लगाम कसना जानता है। सरकार में पोस्टिंग और प्रमोशन में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर दिया जो पिछली सरकार में उद्योग का रुप ले चुका था।
विष्णुदेव सरकार जिसे सुशासन का पर्याय कहा जाता है ,उसमें पहले सुशासन तिहार में शिक्षा की स्थिति पर गंभीरता से काम करके एक-एक जिले के रिजल्ट का मूल्यांकन किया गया। युक्तियुक्तकरण करके समायोजन किया गया ताकि कोई भी शाला शिक्षकविहीन ना रहे। पहले सुशासन तिहार में ही ताबड़तोड़ कार्रवाईयां करके सरकार के इकबाल को गांव-गांव तक पहुंचाया। सरकार के दूसरे ..सुशासन तिहार .. में सड़कों की गुणवत्ता से लेकर खाद वितरण में गड़बड़ी को लेकर निलम्बन के निर्देश दिए हैं। वहीं जनवरी 2026 में खत्म हुई धान-खरीदी में हुई गड़बड़ियों, परिवहन की खामियों और दूसरे राज्यों से बिकने आए धान को लेकर लेकर कम से कम 25 अधिकारियों को निलम्बित कर अपने मजबूत और सख्त इरादों का इजहार किया।
छत्तीसगढ़ के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार देखा या सुना गया कि 22 आबकारी अधिकारियों का एक-साथ निलम्बन हुआ। जबकि इन अधिकारियों को निलम्बन की कार्रवाईयों से बचाने के लिए सरकार पर इतना दबाव था कि यह तर्क तक गढ़ा गया कि इतनी बड़ी कार्रवाई से आबकारी विभाग ठप्प हो जायेगा। लेकिन जीरो टॉलरेन्स पर अपने मजबूत इरादों वाले मुख्यमंत्री ने एक झटके में 22 अधिकारियों को निलम्बित करके साफ कर दिया कि सरकार में भ्रष्टाचार का कोई स्थान नहीं है।
इसी तरह पिछली कांग्रेस सरकार के ऐसे 10 से ज्यादा घोटाले-घपले और वसूली के मामले थे जिन्हें राज्य की एजेन्सी के साथ ही केन्द्रीय एजेन्सी को जांच के लिए सौंपा गया। जिनमें सीजीपीएसपी-2022, सीजीएमएससी घोटाला, कोल लेवी मामला, डीएमएफ घोटाला, भारतमाला मुआवजा वितरण घोटाला और महादेव क्रिकेट सट्टा पर कार्रवाईयां करके दिखा दिया। इन सभी मामलों में बड़े-बड़े अधिकारियों को जेल भेजने में कोई कसर नहीं रखी। जहां नक्सलवाद जैसी 40 साल पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने का संकल्प भी साफ दिखाई दिया। वहीं बलौदाबाजार हिंसा मामले में कलेक्टर-एसपी को निलम्बित करने में देर नहीं लगायी। जहां पुलिस के आईजी स्तर के अधिकारी पर आरोप लगे तो उनके निलम्बन और कार्रवाई में कोई कमी नहीं रखी। बस्तर में पत्रकारों को गांजा तस्करी के झूठे मामलों में फंसाने वाले थानेदार को बर्खास्त कर तुरंत जेल भेजा गया वहीं रायपुर में आतंक का पर्याय बने तोमर बंधुओं जैसे माफियाओं पर मारक प्रहार करने से नहीं चूके। ड्रग्स, अवैध शराब,जुआं-सट्टा और कबाड़ के अवैध धंधों पर ना सिर्फ आरोपियों पर कार्रवाईयां हुईं बल्कि इन गतिविधियों में शामिल पुलिस और राजनीतिक दलों के लोगों पर भी एक्शन लिए गए।

सुशासन सरकार के मुखिया विष्णुदेव साय ने सख्ती का अर्थ अवैध, गलत, गैरकानूनी ,लापरवाही और आपराधिक गतिविधियों को रोकने के रुप में परिभाषित किया ना कि राजनीतिक प्रतिशोध या भय का शासन कायम करने में। यही वजह है कि परित्राणाय साधुनाम को अपने राजनीतिक जीवन और कार्य-व्यवहार में जीवंत कर दिखाया। मुख्यमंत्री अच्छे, ईमानदार और जबावदेह लोगों के लिए भाई,मित्र औऱ संरक्षक हैं वहीं गलत लोगों के लिए संहारक, प्रहारक और शमनकारी हैं।