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Bengal election preparations intensify: Mamata Banerjee makes major announcement by projecting herself as the face of 294 seats
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी हर सीट पर उनके नेतृत्व के नाम पर मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि 294 सीटों पर वही पार्टी का चेहरा रहेंगी, यानी हर वोट सीधे उनके कामकाज और नेतृत्व पर जाएगा।
‘अस्मिता बनाम बाहरी’ की रणनीति
चुनावी रैली में ममता ने मुकाबले को बंगाल की पहचान बनाम बाहरी ताकतों की लड़ाई बताया। उन्होंने आक्रामक अंदाज में विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य के भविष्य का फैसला दिल्ली में बैठकर नहीं किया जा सकता।
केंद्र पर साधा निशाना
ममता बनर्जी ने गृह मंत्री पर भी तंज कसते हुए ‘हरिदास’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और विपक्षी दल बंगाल की जनसंख्या और सामाजिक समीकरणों को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस पर भी उठाए सवाल
ममता ने विपक्षी एकजुटता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कई बार कांग्रेस से सहयोग की कोशिश की गई, लेकिन मतदाता सूची में गड़बड़ियों जैसे मुद्दों पर संयुक्त पहल नहीं हो सकी। इससे विपक्ष की रणनीति कमजोर नजर आई।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
उन्होंने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों को पक्षपातपूर्ण तरीके से नियुक्त किया गया है, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ममता ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया।
पार्टी कार्यालय में हंगामा
वहीं दूसरी ओर, उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में जमकर हंगामा हुआ। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसमें एक कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है।
महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोप
हंगामे के दौरान महिला कार्यकर्ताओं के साथ धक्का मुक्की और बदसलूकी के आरोप भी सामने आए हैं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ समय के लिए माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।
बाहरी उम्मीदवारों को लेकर नाराजगी
जानकारी के मुताबिक, कई कार्यकर्ता बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने से नाराज थे। विरोध प्रदर्शन इसी मुद्दे को लेकर शुरू हुआ, जो बाद में टकराव में बदल गया।
चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
इन घटनाओं से साफ है कि चुनाव से पहले ही सियासी माहौल गर्म हो चुका है। एक ओर जहां सत्ताधारी दल आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में है, वहीं विपक्षी दलों के भीतर ही असंतोष खुलकर सामने आ रहा है।