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Bhupesh Baghel and Kedar Kashyap at loggerheads over mineral rights.
राज्य की खनिज संपदा और राज्यों के अधिकार को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपश बघेल और वन मंत्री केदार कश्यप आमने-सामने आ गए हैं। बघेल ने खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम 2026 को राज्यों के वित्तीय अधिकारों में कटौती और संघीय ढ़ांचे को कमजोर करने वाला बताते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। वहीं केदार कश्यप ने पलटवार करते हुए कहा, कि प्राकृतिक संसाधनों और प्रदेश के हितों की रक्षा भाजपा सरकार की प्राथमिकता है। कांग्रेस राजनीतिक भय पैदा करने के बजाय तथ्यों के साथ बात करे।
भूपेश बघेल ने कहा, कि संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के पारित संशोधनों के बाद राज्य अपने यहां निकलने वाले खनिजों पर उपकर नहीं लगा सकेंगे। खनिज संपदा वाले राज्य के लिए यह बड़ा आर्थिक नुकसान है। कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, टिन और जिंक जैसे खनिजों से मिलने वाले राजस्व पर इसका असर पड़ सकता है। कई राज्यों के विरोध के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार इस मुद्दे पर मौन क्यों है। इसके अलावा बघेल ने स्कूल, पीएम आवास और वंदे मातरम पर भी भाजपा सरकार की घेराबंदी की। वंदे मातरम के मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित साह को चुनौती देते हुए कहा, कि वे बिना टेलीप्रॉम्पटर के पूरा वंदे मातरम गाकर सुनाएं।
वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने इसपर पलटवार करते हुए कहा, की भूपेश बघेल सत्ता से बाहर होने के बाद लगातार झूठ और भ्रम की राजनीति कर रहे हैं। खनिज संशोधन पर उन्होंने कहा, कि राज्य के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा। सरकार प्रदेश के विकास, रोजगार और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है। वास्तविक प्रभाव और तथ्यों का आकलन किए बिना भय पैदा करना कांग्रेस की आदत बन गई है। कश्यप ने बघेल को उनके पांच वर्ष के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि जनता आरोप नहीं, काम और परिणाम देखती है।
आपको बता दें, कि खनिज के मुद्दे पर शुरू हुए इस सियासी वार-पलटवार के आने वाले दिनों में और भी तेज होने के आसार हैं।