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Big decision of Supreme Court: Instructions to register FIR in Raipur IVF child swap case
रायपुर: सहायक प्रजनन तकनीक (IVF) से जन्मे बच्चों की अदला-बदली के गंभीर आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें अपीलकर्ताओं की FIR दर्ज कराने की मांग को खारिज किया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने रायपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि अपीलकर्ताओं की शिकायत पर FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू करें।
मामला रायपुर स्थित माता लक्ष्मी नर्सिंग होम, पहलजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर से जुड़ा है। अपीलकर्ताओं ने IVF प्रक्रिया करवाई थी और 25 दिसंबर 2023 को जुड़वा बच्चों (एक लड़का और एक लड़की) को जन्म दिया। आरोप है कि क्लिनिक में लड़के को लड़की से बदल दिया गया। बाद में कराई गई DNA रिपोर्ट में सामने आया कि जुड़वा बच्चों में से एक का जीन माता-पिता दोनों से मेल नहीं खाता।
अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने कभी भी बाहरी दाता के शुक्राणु के उपयोग की सहमति नहीं दी थी और सहमति पत्र में हेरफेर किया गया। उन्होंने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 24(ग) का हवाला देते हुए कहा कि एक ही उपचार चक्र में एक से अधिक पुरुष या महिला से प्राप्त युग्मकों या भ्रूणों का उपयोग कानूनन प्रतिबंधित है।
प्रतिवादी पक्ष का कहना है कि IVF प्रक्रिया में तीन भ्रूण प्रत्यारोपित किए गए थे और अंडाणु व शुक्राणु दाताओं के मामले में अपीलकर्ताओं की सहमति थी। साथ ही शिकायत को देर से दर्ज करने को सोची-समझी कार्रवाई बताया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रूण प्रत्यारोपण को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट वैधानिक ढांचा मौजूद है और प्रथम दृष्टया मामला आपराधिक जांच के योग्य है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक शक्तियों को किसी वैधानिक ढांचे से सीमित नहीं किया जा सकता।