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CG Assembly Monsoon Session: Raipur's drinking water crisis heats up proceedings in the House; Opposition poses sharp questions to the government regarding the Amrit Mission and water supply system.
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई। शुरुआत में ही राजधानी रायपुर में हर साल होने वाले पेयजल संकट का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विपक्षी विधायकों ने शहर में पानी की आपूर्ति, अमृत मिशन की प्रगति और जल वितरण व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
विधायक सुनील सोनी ने आरोप लगाया कि रायपुर में जिन इलाकों में पानी की टंकियां बनी हुई हैं, वहीं सबसे अधिक टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से विफल है और हर साल राजधानी के लोग गंभीर जल संकट झेलने को मजबूर हैं।
पूर्व मंत्री और विधायक राजेश मूणत ने सरकार से सवाल किया कि रायपुर के लोगों को घर-घर नियमित पेयजल आपूर्ति कब तक सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया कि तीन वार्डों में 24 घंटे जलापूर्ति के लिए दोबारा पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। मूणत ने यह भी दावा किया कि शहर में करीब 90 हजार अवैध पानी कनेक्शन मौजूद हैं।
विधायक अजय चंद्राकर ने रायपुर में अमृत मिशन के क्रियान्वयन को लेकर विभागीय मंत्री अरुण साव से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि योजना कितने वार्डों के लिए बनाई गई थी और कितनी राशि का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। चंद्राकर ने कहा कि जब 1.21 लाख घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, तो आखिर योजना किस आधार पर तैयार की गई थी।
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने बताया कि रायपुर में अमृत मिशन का क्रियान्वयन वर्ष 2016 से शुरू हुआ। उपलब्ध राशि के अनुसार पांच पैकेज स्वीकृत किए गए, जिनमें कई कार्य आंशिक रूप से पूरे हो सके। वर्तमान में 304 करोड़ रुपये के कार्य प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और गिरते भूजल स्तर के बावजूद सरकार सभी घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
अजय चंद्राकर ने स्मार्ट सिटी और 15वें वित्त आयोग से मिली राशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाया। इस पर मंत्री ने बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत 45.33 करोड़ रुपये की राशि से लाभांडी सहित अन्य क्षेत्रों में पेयजल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। इसके अलावा 304 करोड़ रुपये के नए कार्य भी स्वीकृत होकर प्रक्रियाधीन हैं।
विधायक चंद्राकर ने लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHE) विभाग की भूमिका और पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। मंत्री अरुण साव ने कहा कि जल आपूर्ति और उसकी गुणवत्ता जांच के लिए पूरा प्रशासनिक सेटअप मौजूद है तथा कार्यपालन अभियंता इसकी निगरानी करते हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में पीएचई विभाग ही इन योजनाओं का संचालन करता था।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट अजय चंद्राकर ने कहा कि उनका मूल सवाल था कि पीएचई विभाग किस योजना के तहत पानी उपलब्ध कराता है, जिसका स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि उनका सवाल गलत है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन सदन को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
सरकार ने सदन में भरोसा दिलाया कि अमृत मिशन, 15वें वित्त आयोग और अन्य योजनाओं के माध्यम से अधूरे कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। मंत्री अरुण साव ने कहा कि आने वाले समय में राजधानी सहित प्रदेश के सभी घरों तक नियमित पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।