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CG News: CM Vishnu Deo Sai interacted with youth fellows, stating that a developed Chhattisgarh will be built through the participation of the youth.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के प्रतिभागियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों तथा जनसेवा से जुड़े अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने युवा फेलो से कहा कि वे फेलोशिप के अवसर का उपयोग शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली समझने के साथ-साथ अपने ज्ञान, कौशल और नए विचारों के माध्यम से प्रदेश में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं के पास शिक्षा, ऊर्जा, प्रतिभा और नए विचारों की ताकत है। जब इन क्षमताओं का उपयोग जनकल्याण और समाज की बेहतरी के लिए किया जाता है, तो बड़े बदलाव का रास्ता खुलता है। उन्होंने युवाओं को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर परिश्रम करने और प्रत्येक जिम्मेदारी का निर्वहन निष्ठा एवं ईमानदारी से करने की सलाह दी।

मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच में 36 युवाओं का चयन किया गया है। ये युवा इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र सहित विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आते हैं। इनमें कुछ प्रतिभागी अपने स्टार्टअप भी संचालित कर रहे हैं। दो वर्षीय फेलोशिप में पांच महीने का अध्ययन एवं प्रशिक्षण और 19 महीने का मैदानी अनुभव शामिल है। शुरुआती तीन महीने प्रतिभागियों को आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद वे जिला प्रशासन के साथ काम करते हुए सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों में काम करते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है। युवा फेलो संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करें और आंकड़ों, प्रमाणों तथा मैदानी अनुभव के आधार पर व्यावहारिक सुझाव दें। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने और आम लोगों तक जनसेवाओं की पहुंच प्रभावी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने युवाओं को अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग जनहित से जुड़े विषयों पर समाधान तैयार करने के लिए प्रेरित किया।
अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि उनके समय में ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाएं काफी सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ता था। उस समय स्कूलों के भवन कच्चे होते थे और विद्यार्थियों को बैठने के लिए घर से चटाई या जूट का बोरा लेकर जाना पड़ता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल रहा है। इसके अलावा दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए रहने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए युवाओं को शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल में भी दक्ष बनाना आवश्यक है। प्रदेश के जिलों में लाइवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, 30 आईटीआई का उन्नयन कर उन्हें उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से करीब 24 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। रायपुर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया और लगभग पांच हजार युवाओं को रोजगार के अवसर मिले। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को प्रदेश में ही उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप अवसर मिलें तथा वे नौकरी पाने के साथ दूसरों को रोजगार देने वाले उद्यमी भी बनें।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को प्राथमिकता दी गई है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव हासिल करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलना है।
अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं को सामने रखा गया। प्रदेश की खनिज संपदा, वनोपज और औद्योगिक संभावनाएं विकास को नई गति दे सकती हैं। सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे नए क्षेत्रों में निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों वाली अस्पताल सुविधाओं की परिकल्पना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों के अनुसार युवाओं को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य के बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत छह लाख विद्यार्थियों को एआई की शिक्षा देने और लगभग डेढ़ हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है। छत्तीसगढ़ के युवाओं को इस बदलाव में केवल भागीदार ही नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना सरकार का प्रयास है।
संवाद के दौरान जीवन की प्रेरणा से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि लगभग दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्हें अपनी मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं बैलों से हल चलाने सहित खेती के कई काम किए। इन परिस्थितियों ने उन्हें कम उम्र में ही मेहनत करना, जिम्मेदारी निभाना और कठिनाइयों का सामना करना सिखाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे गांव के सरपंच बनेंगे, लेकिन निर्विरोध सरपंच चुने जाने के बाद उन्हें विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए कहा कि उनका धैर्य, सहजता और आत्मीय व्यवहार उनके लिए प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच रहना, लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध रहना उनके सार्वजनिक जीवन का आधार रहा है।
मुख्यमंत्री ने युवा फेलो से कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिले, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। अपने कार्य के केंद्र में जनकल्याण को रखने से मान-सम्मान और आत्मसंतुष्टि मिलने के साथ प्रदेश, देश और समाज का भी भला होता है।
इस अवसर पर सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने फेलोशिप कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रदेश का विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ पढ़ने और अपने सपनों के छत्तीसगढ़ को लेकर विचार लिखने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने बताया कि फेलोशिप के तहत युवा योजनाओं की निगरानी, नीतिगत विश्लेषण, विभागीय समन्वय और जनसेवाओं में सुधार से जुड़े कार्यों में सहयोग करेंगे। द्वितीय बैच के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) स्कोर और आईआईएम की चयन प्रक्रिया के माध्यम से 36 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित प्रदेश के 14 जिलों के प्रतिभागी शामिल हैं।
संवाद के दौरान रायपुर की नीलिमा भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से फेलोशिप के प्रतिभागियों से उनकी अपेक्षाओं के बारे में पूछा। प्रतिभागी खुशी ने अवसर के लिए आभार जताते हुए कहा कि जिलों में काम करने से प्रशासन और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। जशपुर के अंशुल ने अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और फेलोशिप से जुड़ने के उद्देश्य की जानकारी देते हुए प्रदेश से बाहर पढ़ाई कर रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री का संदेश जानना चाहा।
मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें अपने ज्ञान, कौशल तथा अनुभव का उपयोग जनसेवा एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में करने के लिए प्रेरित किया।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से संचालित की जा रही है। द्वितीय बैच के तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन की प्राथमिकताओं, लोक सेवा गारंटी, हितधारकों की पहचान और मैदानी कार्य से जुड़े विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में आईआईएम रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के उप सचिव सूरज साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।