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Two Naxalites sentenced to 10 years in prison each for plotting to blow up soldiers with a bomb.
कांकेर/भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल अपराधों के खिलाफ चल रही न्यायिक कार्रवाई के बीच भानुप्रतापपुर की एनआईए कोर्ट ने दो नक्सलियों को 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर वर्ष 2023 में कोयलीबेड़ा क्षेत्र के चिलपरस इलाके में सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर विस्फोट करने की साजिश रचने का आरोप था। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए उन्हें विस्फोटक सामग्री के साथ गिरफ्तार कर लिया था।इस फैसले के साथ कांकेर जिले में नक्सल मामलों में एक महीने के भीतर तीन बड़े निर्णय सामने आ चुके हैं। इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के जरिए नक्सली गतिविधियों में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मामले के अनुसार, 28 अक्टूबर 2023 को मुखबिर से सूचना मिलने के बाद पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त टीम चिलपरस स्थित बीएसएफ कैंप से नक्सल विरोधी गश्त के लिए रवाना हुई थी। दोपहर करीब तीन बजे टीम चिलपरस से नयापारा की ओर आगे बढ़ रही थी। इसी क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों को विस्फोट से निशाना बनाने की योजना का मामला सामने आया था।पुलिस की कार्रवाई में दोनों आरोपियों को विस्फोटक सामग्री के साथ पकड़ा गया। इसके बाद मामले की जांच और न्यायिक सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई।
कांकेर जिले में नक्सल अपराधों से जुड़े मामलों की न्यायिक सुनवाई लगातार जारी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रभाकर राव, राजे कांगे और अन्य नक्सलियों से जुड़े कुल 36 मामले पहले लंबित थे। इनमें 11 मामले कांकेर न्यायालय और 25 मामले भानुप्रतापपुर न्यायालय में विचाराधीन थे।इन मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, आर्म्स एक्ट, लूट, मारपीट और नक्सली गतिविधियों से संबंधित आरोप शामिल हैं। अब तक तीन मामलों में फैसला आ चुका है। इनमें दो निर्णय भानुप्रतापपुर और एक कांकेर न्यायालय से आया है। शेष 33 मामलों में सुनवाई जारी है। कुछ मामलों में निकट भविष्य में निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है।
8 सितंबर 2026 को कांकेर की एनआईए कोर्ट ने नक्सली संगठन के शीर्ष नेता एसजेडसीएम प्रभाकर राव, उसकी पत्नी डीवीसी राजे कांगे और तीन अन्य सहयोगियों से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। मामला वर्ष 2015 में कोरर के नागर पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस दल पर हुए हमले से संबंधित था।अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के नक्सली गतिविधियों में शामिल होने से जुड़े साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए थे। पुलिस ने प्रभाकर राव को दिसंबर 2025 में अंतागढ़ से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसकी पत्नी और अन्य सहयोगियों को भी पकड़ा गया था।
16 सितंबर 2026 को भानुप्रतापपुर की एनआईए कोर्ट ने नक्सल अपराध से जुड़े एक अन्य मामले में फैसला सुनाया। इसके बाद जवानों को निशाना बनाने की साजिश से जुड़े मामले में दो आरोपियों को सजा सुनाई गई। लगातार आ रहे फैसलों से जिले में लंबित नक्सल मामलों की सुनवाई को गति मिलने के संकेत हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से ग्रामीणों और पीड़ितों की गवाही को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालतों में गवाहों के सामने आने से अभियोजन पक्ष को मामलों में साक्ष्य प्रस्तुत करने में मदद मिलती है। कांकेर जिले में लंबित मामलों पर सुनवाई जारी रहने के बीच अब शेष प्रकरणों के फैसलों पर भी नजर बनी हुई है।