

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Case of dumping debris into the Mahanadi: All leases of the guilty lessees cancelled.
बिलासपुर। रायपुर जिले के आरंग तहसील अंतर्गत निस्दा गांव में अवैध खनन और महानदी में खनन का मलबा डंप करने के मामले में राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि जांच में दोषी पाए गए सभी पट्टेदारों की माइनिंग लीज रद्द कर दी गई है। साथ ही संबंधित क्षेत्र में वर्तमान में कोई भी माइनिंग लीज कार्यरत नहीं है।
निस्दा निवासी ओम प्रकाश सेन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ लोगों द्वारा स्वीकृत लीज क्षेत्र की सीमा से बाहर जाकर फर्शी पत्थर का खनन किया जा रहा है। याचिका में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने और खनन से निकलने वाले मलबे को महानदी में फेंकने का भी आरोप लगाया गया था।
मामले में शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सक्षम अधिकारियों ने जांच की। जांच के दौरान खनन गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की गई। पर्यावरण संरक्षण मंडल ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए संबंधित खनन गतिविधियों को रोकने के निर्देश जारी किए।
राज्य शासन ने हाईकोर्ट को बताया कि जांच के बाद दोषी पाए गए सभी संबंधित पट्टेदारों की माइनिंग लीज निरस्त कर दी गई है। सरकार के अनुसार फिलहाल उक्त क्षेत्र में कोई भी माइनिंग लीज संचालित नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार और पर्यावरण संरक्षण मंडल की ओर से शिकायत के संबंध में आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं। संबंधित पट्टे भी रद्द किए जा चुके हैं। ऐसे में जनहित याचिका पर आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता फिलहाल नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को निराकृत कर दिया।
हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले को समाप्त करते हुए भी राज्य के संबंधित अधिकारियों और पर्यावरण संरक्षण मंडल को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि लीज क्षेत्र के बाहर अवैध खनन या महानदी में खनन का मलबा डंप करने की कोई घटना सामने आती है, तो कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस निर्देश के साथ हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को पर्यावरणीय नियमों और खनन गतिविधियों की निगरानी जारी रखने की जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है।