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Cases registered against NEET-UG protesters in Bihar will be withdrawn.
पटना। बिहार में NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। बिहार सरकार ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों (FIR) और मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 26 जुलाई की शाम 6 बजे तक दर्ज सभी प्राथमिकियों, परिवादों और कारण बताओ नोटिस को वापस ले लिया जाएगा। साथ ही, गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए लोगों को भी रिहा किया जाएगा।
आंदोलनकारियों को बड़ी राहत
इस फैसले से उन छात्रों और आंदोलनकारियों को राहत मिलेगी, जो NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल थे। सरकार ने यह भी कहा है कि आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ भविष्य में कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सीजेपी ने दी थी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सरकार के फैसले से पहले दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और छात्र संगठन सीजेपी (CJP) के प्रतिनिधियों ने सरकार से सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने की मांग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।
694 लोगों को हिरासत में लिया गया था
बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, छात्र आंदोलन के दौरान राज्यभर में कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें 339 नाबालिग भी शामिल थे, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। वहीं, हिंसक घटनाओं में शामिल 355 लोगों को न्यायालय में पेश किया गया।
कई पुलिसकर्मी भी हुए थे घायल
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में 91 पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए थे। सारण जिले में दो प्रखंड विकास पदाधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए थे, जबकि सीवान और सीतामढ़ी में पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारी जख्मी हुए थे।
कपिल सिब्बल ने जताई आशंका
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कपिल सिब्बल ने आशंका जताई कि प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस भी निशाना बना सकती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने आंदोलनकारियों को कानूनी सहायता देने के लिए आर्थिक सहयोग की भी घोषणा की।
केंद्र और आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति
बताया गया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन खत्म होने से पहले केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत हुई थी। इस दौरान सहमति बनी कि देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी तथा भविष्य में इस मामले में कोई नया केस दर्ज नहीं किया जाएगा। सरकार से इस संबंध में लिखित समझौता जारी करने की भी मांग की गई थी।
सीवान फायरिंग मामले में सिपाही निलंबित
इधर, बिहार बंद के दौरान सीवान में AK-47 से फायरिंग करने वाले सिपाही को निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। हालांकि पुलिस का कहना है कि फायरिंग सरकारी संपत्ति और पुलिस बल की सुरक्षा के लिए की गई थी तथा इस घटना में कोई नागरिक घायल नहीं हुआ।
सरकार के इस फैसले को छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मामलों की वापसी और अन्य सहमतियों पर प्रशासन किस तरह और कितनी जल्दी अमल करता है।