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Ceasefire crisis deepens as Iran openly backs Hezbollah; path to peace agreement proves difficult.
दुबई। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच युद्धविराम और शांति समझौते की संभावनाओं पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ चल रही इजराइली सैन्य कार्रवाई का खुलकर विरोध करते हुए कहा है कि किसी भी व्यापक शांति समझौते के लिए लेबनान से इजराइली सेना की वापसी अनिवार्य शर्त होगी।
ईरान के इस रुख ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत तथा क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाओं को और जटिल बना दिया है।
ईरान का स्पष्ट संदेश: लेबनान से सेना हटे तभी खत्म माना जाएगा संघर्ष
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष को तब तक समाप्त नहीं माना जा सकता, जब तक लेबनान में सैन्य टकराव पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और इजराइल अपने कब्जे वाले इलाकों से सेना वापस नहीं बुलाता।
उन्होंने संकेत दिए कि हिज्बुल्लाह के खिलाफ जारी अभियान को ईरान केवल लेबनान का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे से जुड़ा मामला मानता है।
इजराइल पीछे हटने के मूड में नहीं
दूसरी ओर, इजराइल ने फिलहाल किसी भी सैन्य वापसी के संकेत नहीं दिए हैं। इजराइली नेतृत्व का मानना है कि सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सैन्य अभियान जारी रखना जरूरी है। ऐसे में दोनों पक्षों के रुख में स्पष्ट दूरी दिखाई दे रही है, जिससे सीजफायर की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
यूएन एजेंसी की पहुंच से बाहर हुए ईरानी परमाणु ठिकाने
इस बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। वियना से सामने आई जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी पिछले संघर्ष के बाद प्रभावित ईरानी परमाणु ठिकानों का पूर्ण निरीक्षण नहीं कर पा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के पास कितना संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और उसे किन स्थानों पर रखा गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
अजरबैजान कनेक्शन से बढ़ी हलचल
मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान इजराइल ने अजरबैजान में गुप्त रूप से अपने विशेष सैन्य और खुफिया कर्मियों को तैनात किया था। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क ईरान के खिलाफ संचालित खुफिया और सैन्य अभियानों को समर्थन देने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
हालांकि इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मध्य पूर्व में फिर बढ़ सकती है अनिश्चितता
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा हिज्बुल्लाह के समर्थन में खुलकर सामने आने और लेबनान मुद्दे को शांति समझौते से जोड़ने के बाद क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो सकते हैं। यदि इजराइल और ईरान अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो युद्धविराम की कोशिशों को झटका लग सकता है और मध्य पूर्व में तनाव का नया दौर शुरू होने की आशंका बनी रहेगी।