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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 575 करोड़ रुपये से अधिक के DMF (जिला खनिज न्यास) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट यानी पूरक चार्जशीट पेश की है। ED ने कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा समेत 16 नए लोगों को आरोपी बनाया है। एजेंसी ने रायपुर की अदालत में 214 पन्नों की शिकायत के साथ करीब 7,500 पन्नों के दस्तावेज भी पेश किए हैं।
ED के मुताबिक, इस मामले में पहले भी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की जा चुकी है, जिसमें रानू साहू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब जांच के अगले चरण में 16 और लोगों की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ पूरक शिकायत पेश की गई है।
### टेंडर दिलाने के नाम पर 20 से 30 फीसदी कमीशन का आरोप
ED की जांच में सामने आया है कि DMF फंड से होने वाले विकास कार्यों के टेंडर आवंटन में बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा और उससे जुड़े लोग सरकारी अधिकारियों तथा टेंडर हासिल करने वाली निजी कंपनियों के बीच कड़ी का काम करते थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह नेटवर्क कमीशन लेकर अपनी पसंद की कंपनियों को बड़े-बड़े टेंडर दिलवाने में भूमिका निभाता था। इसके बदले 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन वसूले जाने का आरोप है।
### कई काम कागजों पर, पूरा भुगतान लेने का आरोप
जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। ED के मुताबिक, DMF फंड से जिन कार्यों के लिए टेंडर जारी किए गए, उनमें से कई काम वास्तव में हुए ही नहीं, लेकिन उनके नाम पर पूरा भुगतान प्राप्त कर लिया गया।
एजेंसी ने बैंक खातों के लेन-देन और वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर आरोपियों के बीच आर्थिक लेन-देन और आपसी संबंधों का पता लगाने का प्रयास किया है। ED का आरोप है कि सतपाल सिंह छाबड़ा टेंडर आवंटन समिति और ठेकेदार कंपनियों के बीच संपर्क सूत्र के रूप में काम करता था।
### कलेक्टर से लेकर सब इंजीनियर तक कमीशन का आरोप
DMF घोटाले की जांच में इससे पहले अधिकारियों को कथित तौर पर कमीशन दिए जाने की बात भी सामने आई थी। जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, कमीशन का हिस्सा अलग-अलग पदों के हिसाब से तय था।
* कलेक्टर को 40 प्रतिशत
* CEO को 5 प्रतिशत
* SDO को 3 प्रतिशत
* सब इंजीनियर को 2 प्रतिशत
इसके अलावा आरोप है कि DMF फंड खर्च करने के नियमों में बदलाव कर ऐसे प्रावधान जोड़े गए, जिनसे कमीशन आधारित परियोजनाओं को मंजूरी दिलाना आसान हो सके।
### फंड खर्च के नियमों में बदलाव कर कमीशन वाले प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने का आरोप
जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, DMF फंड खर्च के नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरणों जैसी श्रेणियां जोड़ी गई थीं। आरोप है कि इन संशोधित प्रावधानों का इस्तेमाल जरूरी विकास कार्यों को दरकिनार कर अधिक कमीशन वाले प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के लिए किया गया।
यह पूरा मामला कोरबा जिले में 575 करोड़ रुपये से अधिक के DMF फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से भी रायपुर कोर्ट में करीब 6 हजार पन्नों का चालान पेश किया जा चुका है।
ED की ताजा सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद अब मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा समेत 16 नए आरोपियों की भूमिका पर अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी।