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Chhattisgarh: Excise control on Molasses ends, major decision of High Court
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा मोलासेस यानी शीरे को लेकर बनाए गए 2022 के नियमों को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि कोई भी नियम मूल कानून की सीमा से बाहर जाकर नहीं बनाया जा सकता।
राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में नए प्रावधान लागू करते हुए मोलासेस के उपयोग से जुड़े व्यापारियों और उद्योगों को एक्साइज विभाग के नियंत्रण में लाने की कोशिश की थी। इसके तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया और प्रति टन 200 रुपये का शुल्क तय किया गया।
गौरतलब है कि संबंधित व्यापारी पहले से ही 28 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान कर रहे थे। ऐसे में नए शुल्क को लेकर विरोध शुरू हुआ और कई कंपनियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
कोटिया ट्रेडिंग, अग्रवाल गुड़ाखू और सूर्य फीड्स सहित कई संस्थाओं ने अदालत में याचिका दाखिल कर इन नियमों को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह दोहरा कराधान है, जो व्यापार की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मोलासेस खुद कोई नशीला पदार्थ नहीं है। यह केवल फर्मेंटेशन के बाद शराब निर्माण में उपयोगी होता है, इसलिए इसे सीधे एक्साइज कानून के दायरे में नहीं लाया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि एक्साइज विभाग उन व्यापारियों को नियंत्रित नहीं कर सकता, जो मोलासेस का उपयोग पशु आहार, गुड़ाखू या अन्य औद्योगिक कार्यों में करते हैं।
याचिकाकर्ताओं की इस दलील को भी अदालत ने स्वीकार किया कि पहले से जीएसटी चुकाने के बाद अतिरिक्त एक्साइज शुल्क लगाना दोहरा कराधान है। कोर्ट ने इसे कानूनन गलत ठहराया।
हाईकोर्ट ने पाया कि 2022 में बनाए गए नियम मूल एक्साइज अधिनियम की सीमा से बाहर जाकर तैयार किए गए थे। इसलिए सरकार को उन वस्तुओं पर नियंत्रण का अधिकार नहीं है, जो कानून की परिभाषा में शामिल ही नहीं हैं।
इसी आधार पर अदालत ने पूरे नियमों को अवैध घोषित करते हुए समाप्त कर दिया।
इस निर्णय से मोलासेस से जुड़े व्यापारियों और उद्योगों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें अतिरिक्त लाइसेंस और शुल्क के बोझ से मुक्ति मिल गई है, जिससे कारोबार में सहजता आने की उम्मीद है।