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Chhattisgarh: Fake snakebite compensation racket busted in Bilaspur; several arrested, including a doctor from SIMS.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौत पर मिलने वाले मुआवजे के लिए फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि मौत के वास्तविक कारणों को छिपाकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश दर्शाया जाता था, ताकि मृतकों के परिजन सरकारी मुआवजा प्राप्त कर सकें। मामले में पुलिस ने सिम्स की चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी सहित एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय में पदस्थ तीन बाबुओं को गिरफ्तार किया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतकों की वास्तविक मृत्यु के कारणों को छिपाकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश से मौत दर्शाई जाती थी। इस फर्जीवाड़े के आधार पर मुआवजा लेने की पूरी साजिश को अंजाम दिया जाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह काम संगठित तरीके से किया जा रहा था।
इस मामले में अब तक डॉ. प्रियंका सोनी के अलावा दो मृतकों के परिजनों, एक अधिवक्ता और एसडीएम तथा तहसीलदार कार्यालय में पदस्थ तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी एक अन्य अधिवक्ता है, जो फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है।
पुलिस ने बिलासपुर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में अब तक ऐसे 15 मामलों में एफआईआर दर्ज की है। जांच के दौरान सिम्स में पोस्टमार्टम करने वाले कई अन्य चिकित्सकों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनकी जांच जारी है।
जांच के दौरान महामंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की मौत के मामलों में पता चला कि दोनों की वास्तविक मौत किसी अन्य कारण से हुई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश से मौत दर्शाई गई। आरोप है कि डॉ. प्रियंका सोनी ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की। इन मामलों में मृतक निसार खान की पत्नी, लता सूर्यवंशी के पति और अधिवक्ता राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस अब इस पूरे फर्जीवाड़े के नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने और मुआवजा प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।