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Chhattisgarh: High Court's big decision, strong comment on the right to regularization, question on outsourcing policy
बिलासपुर। बिलासपुर से जुड़े एक अहम मामले में हाई कोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को केवल आउटसोर्सिंग व्यवस्था के नाम पर उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं हो सकता कोर्ट की सख्त टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि जिन कर्मचारियों ने वर्षों तक लगातार सेवा दी है, उन्हें अचानक आउटसोर्सिंग एजेंसियों के हवाले करना उचित नहीं है। अदालत ने इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण करार दिया है।कोर्ट ने कहा कि यदि समान कार्य करने वाले अन्य कर्मचारियों को नियमित किया जा रहा है, तो लंबे समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को इससे वंचित नहीं किया जा सकता।
आयकर विभाग से जुड़ा है पूरा मामला वर्षों की सेवा पर उठा सवाल
यह पूरा मामला आयकर विभाग से जुड़ा हुआ है, जहां याचिकाकर्ताओं ने 10 से 15 वर्षों तक लगातार सेवाएं दी थीं। कर्मचारियों का कहना था कि उनकी सेवाएं संतोषजनक रहीं और विभागीय अधिकारियों ने भी उनके नियमितीकरण की सिफारिश की थी।बाद में नीति में बदलाव कर कई सेवाओं को आउटसोर्स कर दिया गया, जिसके बाद इन कर्मचारियों को भी आउटसोर्सिंग के तहत कर दिया गया।
कैट के फैसले को हाई कोर्ट ने किया रद्द अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला
हाई कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग पर भेजने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के खिलाफ है, जो समानता और समान अवसर की गारंटी देता है।कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ मिलना चाहिए।
प्रदेश में हजारों आउटसोर्स कर्मचारी प्रभावित आंकड़े भी सामने आए
छत्तीसगढ़ में विभिन्न विभागों में एक लाख से अधिक कर्मचारी आउटसोर्स, ठेका और सेवा प्रदाता के रूप में काम कर रहे हैं। इनमें नगरीय प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा, सहकारिता, आबकारी और स्कूल शिक्षा विभाग के हजारों कर्मचारी शामिल हैं।कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह फैसला हजारों कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है और यह उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों को मजबूती देता है।
फैसले का असर और आगे की दिशा
हाई कोर्ट के इस फैसले को कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि केवल तकनीकी आधार पर कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता।अब इस फैसले के बाद अन्य विभागों में भी आउटसोर्सिंग नीति और कर्मचारियों की स्थिति पर नए सिरे से चर्चा होने की संभावना है।