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Chhattisgarh Police Constable Recruitment
नई दिल्ली/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती-2019 से जुड़े वर्षों पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद 2019 की भर्ती प्रक्रिया की प्रतीक्षा सूची में शामिल 400 से अधिक पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब संबंधित विभाग को पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति से जुड़ी आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अदालत ने इसके लिए तीन महीने यानी 90 दिनों की समयसीमा तय की है। लंबे समय से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला बड़ी राहत के तौर पर सामने आया है।
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी
पूरा मामला वर्ष 2019 में आयोजित छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान चयनित अभ्यर्थियों के अलावा कुछ योग्य उम्मीदवार प्रतीक्षा सूची में शामिल थे। हालांकि, प्रतीक्षा सूची में नाम होने के बावजूद इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी।
इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इनमें पारस राम ध्रुव और अन्य अभ्यर्थी शामिल थे। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की।
अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इस याचिका को खारिज कर दिया है। इससे हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर आगे की नियुक्ति प्रक्रिया को गति मिलने की स्थिति बन गई है।
90 दिन में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर तय की गई समयसीमा है। अदालत ने संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया को 90 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।
इसका मतलब है कि अब विभाग को पात्र अभ्यर्थियों से जुड़े दस्तावेज, आवश्यक सत्यापन और नियुक्ति से संबंधित अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं को निर्धारित समय में पूरा करना होगा।
हालांकि, नियुक्ति केवल उन्हीं अभ्यर्थियों की होगी जो अदालत के आदेश और संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार पात्र पाए जाएंगे।
सात साल से इंतजार कर रहे अभ्यर्थी
2019 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़े इस विवाद को अब करीब सात साल हो चुके हैं। इतने लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलने के कारण प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसे अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल है। उम्मीदवारों का कहना है कि लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब उनकी नियुक्ति की उम्मीद मजबूत हुई है।
अभ्यर्थियों की ओर से इन अधिवक्ताओं ने की पैरवी
मामले में अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना आफरीन अली ने प्रमुख दलीलें पेश कीं। उनके साथ अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड (AOR) अभिजीत श्रीवास्तव और अधिवक्ता अंशुमान श्रीवास्तव ने भी मामले में पैरवी की।
कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से नियुक्ति के अधिकार और प्रतीक्षा सूची में शामिल पात्र उम्मीदवारों के मामले को अदालत के समक्ष रखा गया।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की SLP खारिज किए जाने के बाद अब गेंद संबंधित विभाग के पाले में है। विभाग को अदालत के निर्देश के मुताबिक पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति से जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ानी होगी।
400 से अधिक अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई के बाद अब उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने का स्पष्ट रास्ता खुल गया है। 90 दिनों की समयसीमा के कारण विभाग पर भी निर्धारित अवधि में कार्रवाई पूरी करने की जिम्मेदारी होगी।