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Chhattisgarh Police will not wait for a formal complaint; action will be taken as soon as information regarding human trafficking is received.
मानव तस्करी के मामलों में अब पुलिस केवल शिकायत मिलने का इंतजार नहीं करेगी, बल्कि संभावित अपराध की सूचना मिलते ही स्वयं पहल कर नेटवर्क की पड़ताल करेगी। भर्ती करने वाले, परिवहनकर्ता, खरीदने-बेचने वाले, वित्तपोषक और अपराध से लाभ कमाने वालों तक पहुंचकर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए इंटरनेट मीडिया, मैसेजिंग एप, गेमिंग प्लेटफार्म और जाब पोर्टल के जरिए होने वाली आनलाइन भर्ती भी जांच के दायरे में रहेगी।
पुलिस मुख्यालय में बुधवार को आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने थाना स्तर तक प्रशिक्षण का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया। इसमें पुलिस सहित विभिन्न विभागों के 139 अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस कार्यशाला में डीजीपी गौतम ने कहा, कि मानव तस्करी के मामलों में पुलिस के साथ अन्य विभागों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। बंधुआ मजदूरी, लैंगिक शोषण, भीख मंगवाने और घरेलू काम में जबरन नियोजन जैसे अपराधों की पहचान कर उसपर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
कार्यशाला के पहले सत्र में सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी और एनडीआरएफ के पूर्व महानिदेशक डा. पीएम नायर ने मानव तस्करी के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने कहा, कि पुलिस को शिकायत मिलने का इंतजार करने के बजाय संभावित घटनास्थल तक स्वतः पहुंचना चाहिए और अपनी जांच में स्रोत, पारगमन और गंतव्य क्षेत्रों को शामिल करते हुए पूरे नेटवर्क के विरुद्ध साक्ष्य जुटाने चाहिए।
इस कार्यशाला के दूसरे सत्र में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश पाल और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रचना त्यागी ने बताया, कि मानव तस्करी अब ऑनलाइन संदेश से भी शुरू हो सकती है।