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Chhattisgarh: Women commandos in Bastar have become the shield of security forces, playing a key role in the anti-Maoist campaign.
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी विरोधी अभियानों में बस्तर महिला कमांडो की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। घने जंगलों और कठिन परिस्थितियों के बीच महिला कमांडो सुरक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मोर्चा संभाल रही हैं। दंतेश्वरी फाइटर्स, दुर्गा फाइटर्स और बस्तर फाइटर्स की महिला जवान अब माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रहे अभियान में निर्णायक भागीदारी निभा रही हैं।
रणनीति में बदलाव से बढ़ी महिला कमांडो की भूमिका
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, माओवादी संघर्ष के शुरुआती वर्षों में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आती थीं। सर्च ऑपरेशन के दौरान महिला संदिग्धों की तलाशी लेना और ग्रामीण महिलाओं से संवाद स्थापित करना मुश्किल हो जाता था। इसी वजह से सुरक्षा बलों ने महिला कमांडो की भर्ती और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया। वर्ष 2006 में पहली बार डीआरजी में महिला जवानों की भर्ती शुरू हुई और 2016 के बाद उन्हें सक्रिय अभियानों में उतारा गया।
आंकड़े बताते हैं महिला कमांडो का पराक्रम
सुरक्षा बलों के आंकड़ों के अनुसार, बस्तर क्षेत्र में 2,000 से अधिक महिला जवान तैनात हैं। इनमें करीब 120 पूर्व माओवादी महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्होंने अब सुरक्षा बलों का हिस्सा बनकर हिंसा के खिलाफ मोर्चा संभाला है। महिला कमांडो अब तक 200 से अधिक मुठभेड़ों में शामिल हो चुकी हैं और 150 से ज्यादा माओवादियों को मार गिराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बंदूक के साथ सेवा का भी निभा रहीं दायित्व
बस्तर महिला कमांडो केवल सुरक्षा अभियान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांवों में सामाजिक जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं। दंतेश्वरी फाइटर्स की महिला कमांडो सुंदरी इस्काम बताती हैं कि उनका काम माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ ग्रामीणों की मदद करना भी है। जंगल के भीतर बसे गांवों में बीमार लोगों तक दवा पहुंचाना और महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना भी उनके दायित्व का हिस्सा है।
माओवादी विरोधी अभियान में बढ़ता आत्मविश्वास
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि महिला कमांडो की मौजूदगी से अभियानों में नई मजबूती आई है। इससे गांवों में विश्वास का माहौल बना है और सुरक्षा बलों की रणनीति अधिक प्रभावी हुई है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार खतरे के बावजूद बस्तर महिला कमांडो साहस और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।