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Chhattsgarh: Every drop will be fully utilized, 4933 hectares of land in 13 villages will get irrigation benefits from the Bagiya M-CAD scheme.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीते शुक्रवार जशपुर जिले के अपने गृह ग्राम बगिया में समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के तहत बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई प्रणाली के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू, कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
13 गांवों के 4933 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा सिंचाई लाभ
यह महत्वाकांक्षी परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर विकसित की जा रही है। इसके माध्यम से बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 गांवों के लगभग 4933 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
पारंपरिक नहरों की जगह आधुनिक पाइपलाइन नेटवर्क
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह योजना “हर बूंद से अधिक उत्पादन” की अवधारणा को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है। परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। भूमिगत पाइपलाइन से जल का अपव्यय कम होगा, जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी और भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि अब तक वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसानों को वर्षभर सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा, जिससे खेती अधिक लाभकारी बनेगी।
जशपुर बनेगा आधुनिक सिंचाई मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना केवल सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि तकनीक आधारित, टिकाऊ और आधुनिक कृषि व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके सफल क्रियान्वयन से जशपुर जिला देश के लिए आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।
केंद्र सरकार से 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति
राज्य सरकार के अनुसार देश के 23 राज्यों में स्वीकृत 34 एम-कैड परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित परियोजना है। इसके लिए भारत सरकार ने 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जबकि परियोजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है।
सौर ऊर्जा, SCADA और IoT तकनीक का होगा उपयोग
समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल ने बताया कि परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) तथा IoT (Internet of Things) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। डेटा आधारित प्रबंधन प्रणाली के जरिए यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कब और कितनी मात्रा में पानी उपलब्ध कराना है। इससे जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी और किसानों को वैज्ञानिक सिंचाई का लाभ मिलेगा।
किसानों की आय बढ़ाने और जलवायु जोखिम कम करने पर फोकस
परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक बूंद का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, कृषि उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है। साथ ही उन्नत कृषि तकनीकों के माध्यम से किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।
महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित
अधिकारियों ने बताया कि योजना अगले छह महीनों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रारंभिक पांच वर्षों तक इसका संचालन एवं संधारण ठेकेदार द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद इसकी जिम्मेदारी जल उपभोक्ता समिति को सौंपी जाएगी। इस समिति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।