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CG News: Child development schemes gain new momentum under the Sai government; malnutrition declines, and significant success achieved in curbing child marriage.
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा को विकास की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाते हुए पिछले ढाई वर्षों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में राज्य में आंगनबाड़ी सेवाओं के विस्तार, कुपोषण नियंत्रण, बाल संरक्षण और बाल विवाह रोकथाम जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। आईसीडीएस, मिशन वात्सल्य, पोषण अभियान और बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान ने प्रदेश को बाल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
प्रदेशभर में 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक स्वरूप देने का कार्य तेजी से चल रहा है। इन केंद्रों में बिल्डिंग एज लर्निंग एड (BaLA) पेंटिंग, पोषण वाटिका, खेल आधारित शिक्षण और बच्चों के अनुकूल वातावरण विकसित किया जा रहा है, ताकि प्रारंभिक शिक्षा अधिक प्रभावी और आनंददायक बन सके।
मनरेगा के अभिसरण से 2,337 नए आंगनबाड़ी भवनों को मंजूरी दी गई है, जबकि पीएम जनमन योजना के तहत 191 नए केंद्र शुरू किए जा चुके हैं। वहीं नियद नेल्ला नार 2.0 अभियान के माध्यम से 10 जिलों के 12,964 आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों तक नियमित सेवाएं पहुंचा रहे हैं।

सरकार ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या 51,045 से बढ़कर 52,258 हो गई है, जबकि सहायिकाओं की संख्या 44,826 से बढ़कर 51,548 तक पहुंच गई है। इससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक योजनाओं की पहुंच पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।
राज्य सरकार के पोषण अभियान का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। पोषण ट्रैकर ऐप के अनुसार 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में स्टंटिंग में 7.82 प्रतिशत, कम वजन (वेस्टिंग) में 4.36 प्रतिशत तथा अंडरवेट बच्चों की संख्या में 2.76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
दिसंबर 2023 में जहां बौनापन (स्टंटिंग) की दर 30.27 प्रतिशत थी, वह जून 2026 तक घटकर 22.45 प्रतिशत रह गई। विशेषज्ञ इसे नियमित निगरानी, सामुदायिक भागीदारी और आंगनबाड़ी आधारित पोषण सेवाओं का सकारात्मक परिणाम मान रहे हैं।
राष्ट्रीय पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के दौरान छत्तीसगढ़ ने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों के आधार पर राज्य देश में पहले स्थान पर रहा। अप्रैल 2025 के पोषण पखवाड़ा में भी प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया।

सितंबर-अक्टूबर 2025 के पोषण माह में 71,887 गतिविधियां आयोजित की गईं, जबकि अप्रैल 2026 के पोषण पखवाड़ा में 34.93 लाख से अधिक गतिविधियों के माध्यम से जनजागरूकता और पोषण सुधार अभियान चलाया गया। स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए रेडी-टू-ईट इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
अनाथ, परित्यक्त और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए मिशन वात्सल्य प्रभावी सुरक्षा तंत्र के रूप में उभरा है। राज्य में बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या बढ़कर 109 हो गई है।
मुख्यमंत्री बाल उदय योजना के जरिए सैकड़ों बच्चों को शिक्षा, देखभाल और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है। वहीं चाइल्ड हेल्पलाइन पर प्राप्त 1.65 लाख से अधिक कॉल पर त्वरित कार्रवाई कर हजारों बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई गई।
बाल संरक्षण योजनाओं के सकारात्मक परिणाम दत्तक ग्रहण और स्पॉन्सरशिप कार्यक्रमों में भी देखने को मिले हैं। दत्तक ग्रहण से लाभान्वित बच्चों की संख्या 42 से बढ़कर 234 हो गई है, जबकि स्पॉन्सरशिप योजना के लाभार्थी बच्चों की संख्या 767 से बढ़कर 2,037 तक पहुंच गई है। इससे जरूरतमंद बच्चों को पारिवारिक वातावरण और बेहतर भविष्य मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
राज्य सरकार के बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। प्रदेश में बाल विवाह प्रतिरोध अधिकारियों की संख्या बढ़कर 1,382 हो गई है। इसके चलते रोके गए बाल विवाहों की संख्या 109 से बढ़कर 888 तक पहुंच गई है।

सरकार का मानना है कि यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की दिशा में सामाजिक जागरूकता का बड़ा संकेत है।
राज्य सरकार का कहना है कि आधुनिक आंगनबाड़ी व्यवस्था, बेहतर पोषण, मजबूत बाल संरक्षण तंत्र और बाल विवाह उन्मूलन जैसे प्रयासों ने छत्तीसगढ़ को बाल विकास के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव तैयार करना है।