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Congress's performance; Sai's four mantras
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर भाजपा सरकार अपने संगठन और सरकार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस जनता के मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष का रास्ता अपना रही है। दोनों दल आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में संगठन के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए 'चार मंत्र' दिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे "सिर पर बर्फ, मुंह में मिश्री, पैरों में चकरी और व्यवहार में धैर्य" रखें। भाजपा का मानना है कि इन चार सूत्रों के जरिए कार्यकर्ता जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करेंगे और सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाएंगे।
मुख्यमंत्री ने संगठन को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि पार्टी में अधिकांश पद भर चुके हैं। अब किसी पद की अपेक्षा रखने के बजाय सभी कार्यकर्ताओं को संगठन और सरकार के लिए पूरी ताकत से काम करना चाहिए। उनका कहना है कि पार्टी समय और आवश्यकता के अनुसार जिम्मेदारियां देती है और सभी को अवसर मिलता है।
कांग्रेस का जनआंदोलन पर फोकस
दूसरी ओर कांग्रेस जल, जंगल, जमीन, किसानों, युवाओं और भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही है। पार्टी विभिन्न जिलों में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के जरिए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर का कहना है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में केवल जनता ही नहीं बल्कि पार्टी के भीतर भी असंतोष है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं, जबकि भाजपा के भीतर गुटबाजी और आपसी टकराव की स्थिति बनी हुई है।
घोटालों को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
भाजपा ने कांग्रेस के आंदोलनों को पूर्ववर्ती सरकार के कथित घोटालों से ध्यान हटाने की कोशिश बताया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पांडेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में शराब घोटाला, महादेव सट्टा ऐप, डीएमएफ और राइस मिलिंग जैसे मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, जिससे प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हुई।
वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए पुराने मामलों को बार-बार उठा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि वर्तमान सरकार महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और प्रशासनिक मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है।
चुनावी तैयारी में दोनों दल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। भाजपा संगठन विस्तार और सरकारी योजनाओं के प्रचार पर जोर दे रही है, जबकि कांग्रेस जनआंदोलनों और सरकार को घेरने की रणनीति के जरिए अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में जुटी हुई है। ऐसे में आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।