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Questions raised regarding donation amounts at Kedarnath-Badrinath shrines.
देहरादून/रुद्रप्रयाग/चमोली। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई दान राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की दो अलग-अलग जांचों में एक ओर केदारनाथ धाम में दान राशि से आतिथ्य सत्कार पर खर्च किए जाने की पुष्टि हुई है, तो दूसरी ओर बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की चोरी के मामले में आरोपी कर्मचारी के पांच दिनों में आठ बार चोरी करते हुए दिखाई देने का दावा किया गया है।
केदारनाथ में दान राशि से आतिथ्य सत्कार का आरोप सही
बीकेटीसी की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2025 की यात्रा अवधि के दौरान मंदिर समिति के कोष से सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बिना लगभग 6.5 लाख रुपये अग्रिम लेकर आतिथ्य सत्कार पर खर्च किए गए। शासन ने इसे वित्तीय अनियमितता माना है।
जांच में तत्कालीन धाम व्यवस्थापक अरविंद शुक्ला, मुख्य प्रभारी अधिकारी अनिल ध्यानी और तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। मामले में बीकेटीसी को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल के खिलाफ कार्रवाई पर अंतिम निर्णय शासन करेगा।
आरटीआई से खुला मामला
यह मामला मई 2026 में एक आरटीआई के जरिए सामने आया था। आरोप था कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में चढ़ाई गई दान राशि का उपयोग अतिथियों के सत्कार में किया गया। इसके बाद बीकेटीसी ने जांच कर 5 जून को अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी।
जांच में यह भी सामने आया कि मंदिर समिति के कोष से अग्रिम राशि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के जारी की गई थी। हालांकि समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि यात्रा सीजन में विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए वर्षों से अग्रिम राशि जारी करने की व्यवस्था रही है और वीआईपी आतिथ्य का खर्च भी इसी राशि से किया जाता रहा है। लेकिन नियमों के अनुसार ऐसे खर्च से पहले बीकेटीसी अध्यक्ष की अनुमति आवश्यक थी।
बदरीनाथ में चढ़ावे की चोरी की पुष्टि
उधर, बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की चोरी के मामले में बीकेटीसी की चार सदस्यीय जांच समिति ने अपनी जांच पूरी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, जांच में आरोपी वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल पांच दिनों के भीतर आठ बार चढ़ावे की चोरी करते हुए सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए हैं।
फुटेज में आरोपी को नोटों के बंडल मोबाइल के नीचे छिपाकर ले जाते और सोने-चांदी के चढ़ावे को अपनी जेब में रखते हुए देखा गया है। जांच टीम को लगभग 13 दिनों की फुटेज मिली, जिसमें पांच दिनों की रिकॉर्डिंग में ही आठ घटनाओं की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
कई कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। समिति अपनी रिपोर्ट सोमवार को मुख्य कार्याधिकारी को सौंपेगी।
इस मामले में 2 जुलाई को चढ़ावे की गणना के दौरान चोरी का आरोप सामने आया था। इसके बाद मंदिर समिति ने आरोपी कर्मचारी को निलंबित कर दिया और बदरीनाथ कोतवाली में गबन का मुकदमा भी दर्ज कराया गया।
एसआईटी भी कर रही जांच
मामले की जांच कर रही एसआईटी ने 2 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले ली है। साथ ही मंदिर समिति से कई दस्तावेज भी मांगे हैं। हालांकि अब तक सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिसके चलते एसआईटी ने समिति को रिमाइंडर भेजा है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद जांच को और आगे बढ़ाया जाएगा।
दान व्यवस्था पर उठे सवाल
केदारनाथ में दान राशि के कथित दुरुपयोग और बदरीनाथ में चढ़ावे की चोरी की घटनाओं ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इन मामलों पर शासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।