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Chhattisgarh: Controversy over Anganwadi sarees, government strict - orders quality check
रायपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित साड़ियों की गुणवत्ता को लेकर उठे विवाद पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर विभाग ने साड़ियों की दोबारा जांच कराने के आदेश दिए हैं।
खादी बोर्ड को पत्र, दोषियों पर होगी कार्रवाई
विभाग ने खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को पत्र लिखकर साड़ियों की गुणवत्ता की पुनः जांच करने और खामियां मिलने पर जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। कुछ जिलों से मिली शिकायतों और विभागीय जांच में साड़ियों के तय मानकों में कमी सामने आई है।
तकनीकी टीम करेगी दोबारा परीक्षण
सरकार ने निर्देश दिया है कि तकनीकी विशेषज्ञों की टीम साड़ियों की गुणवत्ता का फिर से परीक्षण करे। यदि साड़ियां मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, तो उन्हें तुरंत वापस लेकर नई और बेहतर गुणवत्ता की साड़ियां वितरित की जाएंगी। साथ ही आपूर्तिकर्ताओं पर जुर्माना और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लंबाई में कमी और यूनिफॉर्म विवाद बना मुद्दा
जांच में सामने आया कि साड़ी की कुल लंबाई (ब्लाउज सहित) 6.30 मीटर होनी चाहिए, लेकिन कुछ साड़ियों में ब्लाउज का हिस्सा अधिक काटे जाने से लंबाई कम हो गई। इसके अलावा, कुछ जिलों में आंगनबाड़ी संघ द्वारा यूनिफॉर्म पहनने का भी विरोध किया जा रहा है और इस संबंध में लिखित आपत्तियां दी गई हैं।
खरीद प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, साड़ियों की खरीदी का आदेश 26 मार्च 2025 को जारी हुआ था। उस समय संबंधित अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उसी दौरान पॉलिएस्टर की जगह सूती (कॉटन) साड़ियों का चयन किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, सूती साड़ियां पहली धुलाई में हल्का रंग छोड़ती हैं, जिसे लेकर भी कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है।
मंत्री का बयान- गुणवत्ता से समझौता नहीं
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने स्पष्ट किया है कि साड़ियों की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां भी घटिया साड़ियां वितरित हुई हैं, उन्हें वापस लेकर बेहतर गुणवत्ता की साड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
जांच के बाद सख्त कार्रवाई की चेतावनी
सरकार ने साफ किया है कि जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने विभागीय खरीद प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।