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Crackdown on Mahadev betting app: Co-promoter Ravi Uppal arrested in Dubai
रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। एप के सह-संस्थापक और प्रमुख आरोपित रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, एप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को आठ दिन की सीबीआई रिमांड पर सौंपा गया है। उसे पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया गया है। जांच एजेंसियां रवि उप्पल की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि कराने और उसे जल्द भारत लाने की प्रक्रिया में जुटी हैं।महादेव सट्टा एप के जरिए करीब 80 हजार से 94 हजार करोड़ रुपये के कथित अवैध कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर दोनों छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले हैं। एजेंसियों के मुताबिक, दोनों ने मिलकर इस सट्टा नेटवर्क को आगे बढ़ाया था, लेकिन कारोबार में उनकी भूमिकाएं अलग-अलग थीं।
सौरभ संचालन और प्रचार, रवि वित्तीय नेटवर्क संभालता था
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सौरभ चंद्राकर को महादेव ऑनलाइन बुक के प्रचार-प्रसार और संचालन से जुड़ा बताया गया है। वहीं, रवि उप्पल पर पूरे वित्तीय नेटवर्क को संभालने की जिम्मेदारी होने का आरोप है।ईडी के एक अधिकारी के मुताबिक, उप्पल हवाला के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन और रकम की डिलीवरी का प्रबंधन करता था। जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रदेश के नेताओं और नौकरशाहों तक कथित तौर पर धन पहुंचाने के नेटवर्क में भी उसकी अहम भूमिका थी। एजेंसियों को उम्मीद है कि उससे पूछताछ में सट्टे से अर्जित रकम के लेन-देन, वास्तविक लाभार्थियों और कथित संरक्षण नेटवर्क से जुड़ी जानकारियां मिल सकती हैं।
2023 में भी यूएई में हिरासत में लिया गया था रवि
रवि उप्पल को इससे पहले वर्ष 2023 में भी संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने हिरासत में लिया था। हालांकि, बाद में जांच एजेंसियों को उसके ऑस्ट्रेलिया में होने की जानकारी मिली थी। इस बार दुबई में उसकी गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद भारतीय एजेंसियां उसे प्रत्यर्पित कर भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।
सौरभ को आठ दिन की सीबीआई रिमांड
महादेव सट्टा मामले के मुख्य आरोपित सौरभ चंद्राकर को बुधवार सुबह रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया। सीबीआई ने उससे पूछताछ के लिए रिमांड मांगी थी। बचाव पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट से आए अधिवक्ता तुषार गिरी ने इसका विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सौरभ को आठ दिनों के लिए सीबीआई की हिरासत में सौंप दिया।सीबीआई ने दिल्ली में पूछताछ करने की अनुमति मांगी, जिस पर अदालत ने मंजूरी दे दी। इसके बाद टीम सौरभ को लेकर दिल्ली रवाना हो गई। उसे 12 नवंबर को फिर रायपुर की अदालत में पेश किया जाएगा।
प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने सौरभ की गिरफ्तारी को प्रत्यर्पण की शर्तों के आधार पर चुनौती दी। वकीलों का तर्क था कि भारत की ओर से ओमान को भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध में ईडी के मामले को मंजूरी मिली थी, जबकि सीबीआई के मामले को स्वीकृति नहीं दी गई थी। ऐसे में सीबीआई की ओर से उसे अलग मामले में गिरफ्तार कर रिमांड पर लेना नियमों के विपरीत है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आठ दिन की रिमांड मंजूर की।
2022 की एफआईआर से जुड़ी है सीबीआई जांच
महादेव ऑनलाइन सट्टा एप से संबंधित वर्ष 2022 के मामलों में छत्तीसगढ़ सरकार ने 13 एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई के अनुसार, सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर महादेव बुक को बढ़ावा दिया था। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित किया जाता था।सीबीआई इन मामलों की जांच कर रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ मामलों में आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं।
विकास छापरिया और अनिल अग्रवाल भी जांच एजेंसियों के निशाने पर
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसियों का ध्यान दुबई में मौजूद बताए जा रहे विकास छापरिया और अनिल अग्रवाल उर्फ अतुल पर है। एजेंसियों के अनुसार, दोनों की महादेव सट्टा नेटवर्क के संचालन और कथित अवैध कमाई को ठिकाने लगाने में भूमिका रही है।अनिल अग्रवाल पर सट्टेबाजी की आईडी और पैनल संचालित करने का आरोप है, जबकि विकास छापरिया पर हवाला नेटवर्क के जरिए सट्टे की कमाई को वैध बनाने की व्यवस्था संभालने का संदेह है। दोनों के खिलाफ ईडी की विशेष अदालत से गैरजमानती वारंट जारी होने की जानकारी भी सामने आई है।
दो हजार से अधिक पैनल ऑपरेटरों पर भी नजर
महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े प्रदेश के दो हजार से अधिक पैनल ऑपरेटरों की गतिविधियों पर भी एजेंसियों की नजर है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ऑपरेटर दुबई में मौजूद प्रमोटरों को कार्रवाई से जुड़ी जानकारियां भेज रहे हैं। सौरभ और रवि की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क का संचालन दूसरे लोगों के हाथ में जाने की चर्चा भी है।जांच एजेंसियां भिलाई के अनिल छापरिया, शुभम सोनी और अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। बताया गया है कि अनिल रायगढ़ और जांजगीर-चांपा के कुछ सटोरियों के संपर्क में था। प्रदेश में महादेव सट्टा मामले से जुड़ी 80 से अधिक एफआईआर दर्ज होने की जानकारी है। सीबीआई इनमें से कई मामलों की जांच कर रही है।