

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Datia By-election: Narottam Mishra gets emotional, says the party is paramount and he will campaign for the BJP candidate.
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा में चल रही राजनीतिक हलचल फिलहाल शांत होती नजर आ रही है। पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हुए भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में प्रचार करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी उनके लिए सर्वोपरि है और भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए वह पूरी ताकत से चुनाव प्रचार करेंगे।
सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में दतिया में आयोजित भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नरोत्तम मिश्रा भावुक हो गए। लंबे समय तक दतिया का प्रतिनिधित्व कर चुके मिश्रा का इस बार टिकट कट गया है। टिकट नहीं मिलने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भाजपा उम्मीदवार को विजयी बनाने की अपील की और घर-घर जाकर प्रचार करने का संकल्प लिया।
सभा से पहले भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, नरोत्तम मिश्रा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अयोग्य घोषित होने के बाद कराया जा रहा है। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी।
सूत्रों के मुताबिक, नरोत्तम मिश्रा को उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व उम्मीदवार को लेकर अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है। इसी सिलसिले में वह रविवार को दिल्ली पहुंचे थे और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की कोशिश की थी। हालांकि, उन्हें स्पष्ट संदेश मिला कि पार्टी का निर्णय अंतिम है और उन्हें दतिया लौटकर संगठन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हुए प्रचार अभियान में सक्रिय होने का निर्णय लिया।
दतिया उपचुनाव के लिए नरोत्तम मिश्रा का नाम लंबे समय से प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था। लेकिन भाजपा ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद दतिया और आसपास के क्षेत्रों में मिश्रा समर्थकों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी। स्वयं नरोत्तम मिश्रा ने भी शुरुआती दौर में अपनी असहमति जाहिर की थी।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि प्रदेश संगठन और स्थानीय इकाइयों की ओर से नरोत्तम मिश्रा का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में भेजा गया था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आशुतोष तिवारी को बेहतर विकल्प माना।वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यदि नरोत्तम मिश्रा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचते, तो उनकी वरिष्ठता के आधार पर मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावनाएं बन सकती थीं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने भविष्य के राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया हो सकता है।