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Political showdown certain in Parliament's Monsoon Session; government and opposition set for a confrontation.
नई दिल्ली। 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद भाजपा और एनडीए उत्साहित हैं, जबकि विपक्ष भी सरकार को घेरने के लिए कई राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों के साथ पूरी तैयारी में है।
हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक मानसून सत्र का विधायी एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि वह लंबे समय से लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार दोनों सदनों में अपना संख्याबल मजबूत करने के प्रयास में जुटी है, ताकि आवश्यक समर्थन मिलने पर महत्वपूर्ण विधेयकों को आसानी से पारित कराया जा सके।
सत्ता पक्ष की रणनीति छोटे दलों, निर्दलीय सांसदों और कुछ विपक्षी दलों से मुद्दा आधारित समर्थन हासिल करने की बताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि सरकार आवश्यक बहुमत जुटाने में सफल रहती है तो परिसीमन, महिला आरक्षण समेत संविधान संशोधन से जुड़े कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
दूसरी ओर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने भी सरकार के खिलाफ आक्रामक रणनीति तैयार की है। विपक्ष भ्रष्टाचार के आरोपों, पेपर लीक, एथेनॉल नीति, सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे मुद्दों को संसद में उठाने की तैयारी कर रहा है।
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद एनडीए का राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ा है। वहीं विपक्षी दलों के भीतर मतभेदों की चर्चा भी तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बदलते समीकरणों का असर संसद के दोनों सदनों में भी देखने को मिल सकता है। भाजपा को कुछ छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों के समर्थन की उम्मीद है, जिससे उसका संख्याबल और मजबूत हो सकता है।
यदि सरकार पर्याप्त समर्थन जुटाने में सफल रहती है तो परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की संभावना बढ़ सकती है। इसके अलावा संविधान संशोधन से जुड़े अन्य प्रस्ताव भी संसद में लाए जाने की चर्चा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संकेत दिए हैं कि विपक्ष विभिन्न राज्यों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों, एथेनॉल नीति, कृषि योजनाओं में कथित अनियमितताओं और अन्य समसामयिक विषयों पर सरकार से जवाब मांगेगा। विपक्ष का कहना है कि वह जनहित से जुड़े हर मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाएगा।
बदलते राजनीतिक समीकरण, महत्वपूर्ण विधेयकों की संभावित पेशकश और विपक्ष के आक्रामक तेवरों को देखते हुए इस बार का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर देगी, वहीं विपक्ष जवाबदेही और विभिन्न विवादों को लेकर सत्ता पक्ष को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगा।