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Donald Trump's stern message to Iran: No reconstruction funds.
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते के तहत उसे कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। फ्रांस के एवियन में आयोजित जी सेवन शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 28 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की बात डेमोक्रेट्स द्वारा फैलाई गई है, जबकि ऐसा कोई दायित्व अमेरिका पर नहीं है।
ट्रम्प ने अपने रुख में दोहराया कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उनके अनुसार अमेरिका किसी भी ऐसी योजना को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें ईरान को सैन्य या रणनीतिक लाभ मिल सके। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक कूटनीति में नए समीकरण बन रहे हैं।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने चेतावनी दी है कि यदि लेबनान पर इजराइल के हमले नहीं रुकते तो इसे किसी भी संभावित समझौते का उल्लंघन माना जाएगा और इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। इस बयान ने क्षेत्रीय तनाव को और अधिक गहरा कर दिया है।
पूर्व राजनयिक और ईरान में भारत के राजदूत रह चुके के पी फाबियन के अनुसार आने वाले साठ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके मुताबिक सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका के सामने यह है कि वह ईरान को परमाणु मुद्दे पर सहमत कर सके। ट्रम्प भले ही यूरेनियम निष्क्रिय करने की बात कर रहे हों, लेकिन ईरान इस पर कड़ी सौदेबाजी करेगा और अपनी शर्तें रखेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि 28 लाख करोड़ रुपये के पुनर्निर्माण पैकेज की चर्चा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। ईरान की ओर से पहले 14 बिंदुओं की एक रूपरेखा सामने आई थी जिसमें इसी तरह के बड़े पैकेज का उल्लेख किया गया था। अब ट्रम्प इस दायित्व से दूरी बनाकर इसे काफी सीमित करना चाहते हैं।
कूटनीतिक समीकरणों में बदलाव के साथ अब कतर की भूमिका तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। पहले जहां पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में उपयोग किया जा रहा था, वहीं अब वार्ता आगे बढ़ने के साथ उसकी भूमिका सीमित होती जा रही है। अमेरिका अब कतर को प्रमुख कूटनीतिक साझेदार के रूप में आगे ला सकता है।
इजराइल की सक्रिय सैन्य भूमिका इस समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। लेबनान पर लगातार हमले क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के दबाव में इजराइल अंततः किसी संभावित समझौते को स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड चार प्रतिशत गिरकर 79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो पिछले तीन महीनों का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले युद्ध की आशंका के समय कीमतें 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच थीं।
रिपोर्ट के अनुसार डील की घोषणा के बाद पहली बार तीन ईरानी तेल टैंकर खुले समुद्र में रवाना हुए हैं। वहीं स्विट्जरलैंड की ओर से संकेत मिले हैं कि जिनेवा के बर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में 19 जून को इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।