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Durg Police gets new vehicles equipped with AI technology
छत्तीसगढ़ में आपातकालीन सेवाओं को और अधिक आधुनिक और तेज़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दुर्ग जिले में डायल-112 फेज-2 नेक्स्ट जेन सेवा की शुरुआत के साथ अब पुलिस, मेडिकल और फायर इमरजेंसी में लोगों को पहले से कहीं ज्यादा तेज़ मदद मिल सकेगी। नई तकनीक, AI इंटीग्रेशन और अत्याधुनिक वाहनों से लैस इस सेवा का शुभारंभ पुलिस कंट्रोल रूम सेक्टर-06 भिलाई में स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग और विधि-विधायी मंत्री गजेंद्र यादव ने किया।
मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में पूरे छत्तीसगढ़ में “एक ही नंबर 112 सब्बो झन बर” व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद सड़क नेटवर्क में तेजी से विकास हुआ है। गांवों तक बेहतर सड़कें पहुंचीं और लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से वाहनों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों की आशंका भी बढ़ी है, जिसे देखते हुए आधुनिक तकनीक आधारित डायल-112 सेवा बेहद जरूरी हो गई थी।
उन्होंने बताया कि पहले चरण में यह सेवा 16 जिलों में शुरू हुई थी, जबकि अब इसे राज्य के सभी 33 जिलों तक विस्तारित कर दिया गया है। इसके तहत प्रदेशभर में करीब 400 वाहन दिए गए हैं। अकेले दुर्ग जिले को 35 इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल (ERV) और 4 हाईवे पेट्रोलिंग वाहन मिले हैं। इनमें से चार वाहन हाईवे सुरक्षा के लिए तैनात किए जाएंगे, जबकि बाकी वाहन आम नागरिकों की सहायता के लिए जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में संचालित होंगे।
मंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था पूरी तरह AI बेस्ड और GPS तकनीक से लैस है। पहले किसी घटना की सूचना मिलने पर कॉल सेंटर में लोकेशन समझने और एड्रेस लेने में समय लगता था, लेकिन अब कॉल आने के साथ ही GPS के माध्यम से लोकेशन ट्रेस हो जाएगी और नजदीकी वाहन तुरंत मौके पर पहुंच सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने की स्थिति में भी लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए घटना की जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचा सकेंगे।

गजेंद्र यादव ने कहा कि यह सेवा सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगजनी, मेडिकल इमरजेंसी, कानून व्यवस्था और अन्य आपात स्थितियों में भी तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से लोगों को त्वरित राहत और बेहतर सुरक्षा मिलेगी।
दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य ने बताया कि डायल-112 फेज-2 परियोजना पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक आधुनिक और त्वरित प्रतिक्रिया आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक आधारित कंट्रोल और कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए घटनास्थल तक कम समय में पहुंचना संभव होगा। AI इंटीग्रेशन की वजह से रिस्पांस टाइम को काफी कम करने में मदद मिलेगी, जिससे जनता को तेज़ पुलिस सहायता का लाभ मिलेगा।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि नई ERV और हाईवे पेट्रोलिंग गाड़ियों में GPS, PTZ कैमरा, डैश कैमरा और मोबाइल डेटा टर्मिनल जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इन वाहनों की मदद से पुलिस की निगरानी क्षमता और प्रतिक्रिया प्रणाली दोनों मजबूत होंगी।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि नई गाड़ियों में लगे 360 डिग्री कैमरे कानून व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये कैमरे रियल टाइम रिकॉर्डिंग करते हैं, जिससे घटनास्थल की हर गतिविधि रिकॉर्ड होती रहती है। साथ ही इसका डिटरेंस इफेक्ट भी होता है, यानी लोगों को यह एहसास रहता है कि पूरी घटना लाइव रिकॉर्ड हो रही है, जिससे कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।
विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि डायल-112 सेवा पहले से ही आम लोगों के लिए भरोसेमंद व्यवस्था बन चुकी है और अब नई तकनीक से लैस वाहनों के शामिल होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पुलिस सहायता और मजबूत होगी।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे, महापौर नीरज पाल, संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर अभिजीत सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सुखनंदन राठौर ने किया, जबकि नोडल अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चन्द्रा रहे।
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में डायल-112 सेवा का उपयोग करें और सड़क सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।