

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

E-100 Fuel: Vehicles to now run on 100% ethanol; government grants approval for E-100 fuel
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में बदलाव कर ई-100 यानी लगभग 100% एथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए रास्ता खोल दिया है। नए प्रावधानों के तहत वाहन निर्माता अब ऐसे वाहनों की मंजूरी हासिल कर सकेंगे, जो पेट्रोल से लेकर ई-100 तक अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चल सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना और पेट्रोल की खपत घटाना है। इसके साथ ही हल्के पेट्रोल-डीजल वाहनों की वजन सीमा भी 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है।
ई-100 ऐसा ईंधन है, जिसमें लगभग पूरी मात्रा एथेनॉल की होती है। एथेनॉल का उत्पादन गन्ने, अनाज और कृषि अवशेषों जैसे स्रोतों से किया जा सकता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण पर चल सकें। इनके सेंसर ईंधन में एथेनॉल की मात्रा पहचानकर इंजन की सेटिंग को उसके अनुसार समायोजित करते हैं।
नहीं, मौजूदा ई-20 वाहनों में सीधे ई-100 ईंधन भरवाना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। ई-100 के इस्तेमाल के लिए इंजन और ईंधन प्रणाली का इसके अनुकूल होना जरूरी है। इसके लिए फ्यूल पंप, पाइप, सील और इंजेक्टर जैसे पुर्जों को एथेनॉल के अनुरूप डिजाइन करना पड़ता है। इसलिए ई-100 का इस्तेमाल केवल उन वाहनों में किया जाना चाहिए, जिन्हें इसके लिए निर्माता ने उपयुक्त घोषित किया हो।
ई-100 में पेट्रोल की तुलना में लगभग 30% कम ऊर्जा होती है। ऐसे में समान दूरी तय करने के लिए अधिक मात्रा में ईंधन की जरूरत पड़ सकती है और वाहन का माइलेज घट सकता है। हालांकि, वास्तविक माइलेज वाहन के इंजन, तकनीक और ड्राइविंग परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। ई-100 इस्तेमाल करने से खर्च कम होगा या बढ़ेगा, यह इसकी कीमत और वाहन की ईंधन दक्षता पर निर्भर करेगा।
एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होने से इंजन में नॉकिंग की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, यदि एथेनॉल पेट्रोल की जगह प्रभावी रूप से इस्तेमाल होता है, तो आयातित कच्चे तेल की मांग घट सकती है। एथेनॉल आधारित ईंधन से कुछ प्रदूषक उत्सर्जन भी कम हो सकते हैं। हालांकि, पर्यावरण पर इसका वास्तविक प्रभाव उत्पादन प्रक्रिया और इस्तेमाल किए गए कच्चे माल पर निर्भर करेगा।
ई-100 के व्यापक इस्तेमाल के लिए पर्याप्त एथेनॉल उत्पादन और उसके वितरण की व्यवस्था विकसित करनी होगी। यदि उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर कृषि भूमि, पानी और खाद्य फसलों का उपयोग किया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए एथेनॉल उत्पादन में कृषि अवशेषों जैसे वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है।
मोटर वाहन नियमों में बदलाव से वाहन निर्माताओं के लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक विकसित करने और उसे मंजूरी दिलाने का रास्ता आसान होगा। हालांकि, ई-100 के व्यापक उपयोग के लिए उपयुक्त वाहनों, ईंधन उपलब्धता और वितरण नेटवर्क का विस्तार जरूरी रहेगा। आम वाहन चालकों को भी ई-100 अपनाने से पहले वाहन की अनुकूलता, माइलेज और ईंधन की कीमत पर ध्यान देना होगा।