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Election Commission’s response to the Supreme Court regarding the SIR; claims all three orders were issued unanimously
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने अपनी प्रक्रिया को कानून सम्मत बताते हुए कहा कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी किए गए तीनों आदेश मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से पारित हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग के कई फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए। इस मामले में अदालत ने 5 अक्टूबर को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किए थे।इससे पहले एक समाचार रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान एसआईआर से संबंधित फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई थी। आयोग ने इन आरोपों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके कामकाज से रोकने का उचित आधार मानने से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे को भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति प्राप्त है।
निर्वाचन आयोग ने अपने जवाब में संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और संबंधित नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उसे मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है। आयोग ने एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोपों को भी खारिज किया।आयोग का कहना है कि एसआईआर के लिए निर्धारित घोषणा-पत्र वैधानिक फॉर्म का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक अलग दस्तावेज है। इसका उद्देश्य आवेदक की पात्रता की जांच करना और उसके या उसके रिश्तेदारों के नाम को पिछली एसआईआर की मतदाता सूची से जोड़ने में सहायता करना है।
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित की।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र में कुल 9.79 करोड़ मतदाताओं में से करीब दो करोड़ लोगों के नाम मसौदा मतदाता सूची से हटा दिए गए। इनमें लगभग 1.22 करोड़ नाम तार्किक विसंगतियों के आधार पर हटाए जाने का दावा किया गया है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मुंबई और पुणे में पुनर्विकास के कारण दूसरे स्थानों पर जा चुके मतदाताओं के नाम व्यक्ति नहीं मिला जैसी टिप्पणी के आधार पर सूची से हटा दिए गए। दावा किया गया कि इन शहरों में करीब 40 प्रतिशत मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं।अदालत में यह मुद्दा भी उठाया गया कि पहले से मतदान कर चुके लोगों से फॉर्म-6 भरवाना उचित नहीं है। इस फॉर्म में पहली बार मतदाता पंजीकरण से संबंधित घोषणा होती है, इसलिए मौजूदा मतदाताओं से इसे भरवाने पर गलत घोषणा की स्थिति पैदा हो सकती है।याचिकाकर्ता ने एसआईआर पर रोक लगाने, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा बढ़ाने तथा 6 नवंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची को टालने की मांग की। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस प्रक्रिया के चलते किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलेगा।
नई दिल्ली। रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों ने सोमवार को कश्मीरी गेट इलाके में प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने मांग की कि रैली दिवाली के बाद आयोजित की जाए, ताकि त्योहार के दौरान कारोबार प्रभावित न हो।चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि रैली में 10 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। इतनी बड़ी भीड़ के कारण पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित 20 से अधिक बड़े थोक बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने व्यापारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि वे दिल्ली के व्यापारियों की बात सुन रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मेट्रो सेवाएं बंद करने और सड़कों को सील करने के कारण राजधानी में लोगों को परेशानी हो रही है।राहुल गांधी ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब वोट ही चोरी हो जाए, तो किसी की दुकान, बचत और बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की और दावा किया कि ऐसा करने से 30 सेकंड में आंदोलन रुक सकता है।
एसआईआर की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई निर्धारित है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इन मामलों पर सुनवाई करेगी।