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ED's major claim: All five of KK Srivastava's companies are shell companies; documents and bank transactions are also under scrutiny.
रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान प्रभावशाली रहे कथित तांत्रिक कृष्ण कुमार उर्फ केके श्रीवास्तव के खिलाफ जांच में कई अहम दावे किए हैं। एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान उसकी पांचों कंपनियां फर्जी पाई गईं। दस्तावेजों में दर्ज पतों पर जांच टीम पहुंची तो वहां किसी भी कंपनी का कोई अस्तित्व नहीं मिला।
ईडी का कहना है कि कंपनियों के पंजीकरण के लिए लगाए गए दस्तावेज भी कथित तौर पर जाली पाए गए हैं। इसके अलावा कंपनियों से जुड़े बैंक खातों में हुए वित्तीय लेनदेन भी संदेह के दायरे में हैं, जिनकी विस्तार से जांच की जा रही है।
एजेंसी का आरोप है कि केके श्रीवास्तव पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित धोखाधड़ी की रकम उसके खातों तक कैसे पहुंची। साथ ही एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़ित को लौटाए गए 3.40 करोड़ रुपये का स्रोत क्या था, इसका भी स्पष्ट जवाब अब तक नहीं मिला है।
प्रवर्तन निदेशालय ने कृष्ण कुमार उर्फ केके श्रीवास्तव को 30 जुलाई को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह 7 अगस्त तक ईडी की रिमांड पर है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार, जून 2023 में केके श्रीवास्तव पर रावत एसोसिएट्स के संचालक को स्मार्ट सिटी योजना के तहत 500 करोड़ रुपये का ठेका दिलाने का झांसा देने का आरोप है। इसी बहाने कथित रूप से 15 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी किए जाने के मामले की जांच ईडी कर रही है। मामले से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल जारी है।