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Election Commission cracks down on the use of Form 7; a deadline has now been set for submitting applications... voters who missed out will have a chance until October 31.
नई दिल्ली। मतदाता सूची से नाम हटवाने या किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फार्म-7 को लेकर निर्वाचन आयोग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने इस फार्म के असीमित इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए आवेदन की अधिकतम संख्या निर्धारित कर दी है। नई व्यवस्था के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर के दौरान एक व्यक्ति अधिकतम 10 फार्म-7 जमा कर सकेगा। वहीं, मतदाता सूची के सामान्य पुनरीक्षण के दौरान एक महीने में अधिकतम पांच आवेदन देने की अनुमति होगी। इससे पहले आवेदन की संख्या को लेकर ऐसी कोई निर्धारित सीमा नहीं थी।
कर्नाटक समेत कई राज्यों में एक ही व्यक्ति की ओर से बड़ी संख्या में फार्म-7 जमा किए जाने के मामलों के बाद यह कदम उठाया गया है। इन आवेदनों के जरिए मतदाता सूची से कई लोगों के नाम हटाने या उनके नामों पर आपत्ति दर्ज कराने की कोशिशों को लेकर विवाद सामने आए थे।निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता के खिलाफ फार्म-7 जमा कर देने भर से उसका नाम सूची से नहीं हटाया जा सकता। संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ईआरओ को पहले आपत्ति की जांच करनी होगी। आयोग के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को नोटिस दिया जाएगा और उसका बयान भी दर्ज किया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूट गया है या गलती से हटा दिया गया है, तो उसे दोबारा दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिले में इसके लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह अभियान 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा।इस अभियान में उन नागरिकों को शामिल किया जा रहा है, जो पात्र होने के बावजूद मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज नहीं करा सके। इसके साथ ही नए मतदाताओं का पंजीयन भी किया जा रहा है। एक अक्टूबर तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
एसआइआर के बाद पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं होने की जानकारी मिलने पर निर्वाचन तंत्र ने सत्यापन की प्रक्रिया तेज की है। बूथ स्तर के अधिकारी यानी बीएलओ घर-घर जाकर मौजूदा मतदाता सूची का पुराने रिकॉर्ड से मिलान कर रहे हैं।जांच के दौरान पात्र पाए जाने वाले नागरिकों से फार्म-6 भरवाया जा रहा है, ताकि उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जा सकें। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित सूचियां मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों यानी बीएलए के साथ भी साझा की जा रही हैं।
जिन लोगों का नाम एसआइआर के दौरान छूट गया है या जो पहली बार मतदाता बन रहे हैं, उन्हें आवेदन करने के लिए बीएलओ के घर आने का इंतजार करना जरूरी नहीं है। वे ऑनलाइन माध्यम से भी पंजीयन करा सकते हैं।
इसके लिए निम्न प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाएं या ईसीआइनेट मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करें।पोर्टल या ऐप पर लॉगिन करें।मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फार्म-6 का विकल्प चुनें।मांगी गई व्यक्तिगत जानकारी भरें और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।आवेदन की जानकारी जांचने के बाद उसे सबमिट कर दें।पहली बार मतदाता बनने के पात्र युवा भी इसी प्रक्रिया के जरिए पंजीयन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
एसआइआर से संबंधित उपलब्ध जिला स्तरीय आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाताओं के पते पर नहीं मिलने, जिला छोड़ने या उनकी मृत्यु होने के कारण फॉर्म जमा करने में कठिनाई आई थी।आंकड़ों के मुताबिक, 1.83 लाख से अधिक मतदाताओं के जिला छोड़ने, करीब 1.30 लाख लोगों के पते पर अनुपस्थित मिलने और 71 हजार से ज्यादा मतदाताओं की मृत्यु होने की जानकारी सामने आई थी। इन परिस्थितियों के कारण बीएलओ करीब 4.33 लाख फॉर्म जमा नहीं कर सके थे। बाद में जमा हुए फॉर्म की संख्या में कुछ वृद्धि दर्ज की गई।उपलब्ध विवरण के अनुसार, जिले की छह विधानसभा सीटों में 12,71,598 मतदाताओं के फॉर्म की प्रविष्टि की गई थी। एसआइआर से पहले जिले में मतदाताओं की कुल संख्या 16,75,770 बताई गई थी।
नए मतदाताओं और युवाओं को पंजीयन की सुविधा देने के लिए 21 अक्टूबर तक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विशेष शिविर आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। इस अभियान के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों वाले स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में मतदाता पंजीयन के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के माध्यम से बीएलओ के सहयोग से पात्र युवाओं को आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी और उनका पंजीयन कराने में सहायता की जाएगी।निर्वाचन आयोग की ओर से फार्म-7 की संख्या सीमित करने और छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए पंजीयन अभियान चलाने का उद्देश्य मतदाता सूची में अनियमितताओं की आशंका को कम करना तथा योग्य नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित होने से बचाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।