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Federation writes to School Education Minister, states: 'Protest is a compulsion, not a choice.'
रायपुर। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा है कि शिक्षकों का आंदोलन किसी शौक का परिणाम नहीं, बल्कि सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग की लगातार अनदेखी से उपजी मजबूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग को सेवारत शिक्षकों की समस्याओं, उनके दर्द और वर्षों से लंबित मांगों को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
राठौर ने कहा कि साझा मंच द्वारा आयोजित ‘सेवा, सुरक्षा, न्याय रैली’ का उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई को किसी भी स्थिति में प्रभावित करना नहीं था। शिक्षक समाज ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया और यह संदेश दिया कि शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर उतने ही संवेदनशील हैं, जितने अपनी सेवा और अधिकारों को लेकर।
फेडरेशन अध्यक्ष के मुताबिक प्रदेश के सभी 146 विकासखंडों में ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया। इसके बावजूद विभाग की लगातार खामोशी और उदासीनता के कारण शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सरकार शिक्षकों की पीड़ा को समझती और उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक पहल करती, तो आंदोलन की स्थिति ही निर्मित नहीं होती।
राठौर ने कहा कि शिक्षक लगातार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सरकार से सेवा सुरक्षा, न्याय और सम्मानजनक सेवा शर्तों की मांग कर रहे हैं। मांगों को लगातार टालते रहना समस्या का समाधान नहीं है। अब सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए ठोस निर्णय लेना चाहिए।
साझा मंच को उम्मीद है कि आज होने वाली विभागीय बैठक महज औपचारिकता बनकर नहीं रह जाएगी। शिक्षकों को भरोसा है कि सरकार उनके हित में सकारात्मक, ठोस और न्यायपूर्ण निर्णय लेकर राहत प्रदान करेगी।
राठौर ने कहा कि शिक्षकों के धैर्य की परीक्षा अब और नहीं ली जानी चाहिए। शिक्षक बच्चों का भविष्य गढ़ते हैं, इसलिए अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह शिक्षकों के भविष्य को भी सुरक्षित करे।
राठौर ने शिक्षा मंत्री के नाम पत्र में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों की चिंता सामने रखी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक इस मुद्दे पर अपनी बात कई बार विभाग और सरकार के संज्ञान में ला चुके हैं।
उन्होंने पत्र में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए अगस्त 2028 तक का समय दिया है। ऐसे में टीईटी की अनिवार्यता के आधार पर अभी से शिक्षकों को उनके अधिकारों से वंचित किए जाने को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
राठौर ने कहा कि शिक्षक कभी नहीं चाहते कि कलम और चॉक थामने वाले उनके हाथ नारों और आंदोलनों के लिए उठें। शिक्षक पढ़ाना चाहते हैं, अपनी जिम्मेदारियां निभाना चाहते हैं और विद्यार्थियों के भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं।
उन्होंने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि शिक्षकों को शिक्षक बने रहने दिया जाए और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
फेडरेशन अध्यक्ष ने आज की बैठक में विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए टीईटी की अनिवार्यता के आधार पर पदोन्नति से संबंधित जारी आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि टीईटी के स्थान पर मौजूदा नियमों और शिक्षकों की वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति प्रदान की जानी चाहिए। राठौर ने विश्वास जताया कि सरकार शिक्षकों की पीड़ा, चिंता और न्यायोचित मांगों को गंभीरता से समझते हुए उनके हित में सकारात्मक निर्णय लेगी।