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Floodwaters have begun to recede in Bastar, but the crisis persists; affected families are receiving financial aid of ₹10,000 each, though water released from Odisha could once again raise the water level of the Indravati River.
जगदलपुर। बस्तर संभाग में बाढ़ का पानी धीरे धीरे उतर रहा है, लेकिन हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। इंद्रावती नदी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद अब इसमें कमी दर्ज की जा रही है। इसी बीच ओडिशा के नवरंगपुर क्षेत्र से इंद्रावती में छोड़ा गया पानी नई चिंता बन गया है। केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों के अनुसार यह पानी मंगलवार रात तक बस्तर पहुंच सकता है, जिससे नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने की आशंका है।बाढ़ के कारण संभाग के पांच जिलों में अब तक आठ लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। कई गांवों और निचले इलाकों में पानी भरने से हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर राहत शिविरों में रखा है।
27 सितंबर को इंद्रावती नदी का जलस्तर 12.46 मीटर तक पहुंच गया था। यह वर्ष 1973 में दर्ज 12.18 मीटर के पुराने रिकॉर्ड से 28 सेंटीमीटर अधिक था। नदी का खतरे का निशान 8.3 मीटर है।बारिश थमने के बाद नदी के जलस्तर में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है। इसके बावजूद नदी के किनारे बसे इलाकों और निचली बस्तियों में बाढ़ के प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
इंद्रावती का जलस्तर घटने के बीच ओडिशा के नवरंगपुर क्षेत्र से छोड़ा गया पानी प्रशासन की चिंता बढ़ा रहा है। रविवार रात 1 बजे से सोमवार शाम 6 बजे तक करीब 250 क्यूमेक प्रति सेकंड की दर से पानी छोड़ा गया। इसकी कुल मात्रा करीब 162 करोड़ लीटर बताई गई है।केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों के मुताबिक यह पानी मंगलवार रात तक बस्तर पहुंच सकता है। ऐसे में इंद्रावती का जलस्तर फिर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें दोबारा बढ़ने की आशंका है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को बस्तर और सुकमा जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने राहत शिविरों में पहुंचकर प्रभावित परिवारों से बातचीत की और अधिकारियों से मौके की स्थिति की जानकारी ली।मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। यह राशि शासन के तहत मिलने वाली अन्य सहायता के अतिरिक्त होगी।साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही न हो। प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामग्री समय पर पहुंचाने के साथ ही स्वास्थ्य और पेयजल की व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है।
बस्तर संभाग के सात जिलों में बाढ़ से करीब 13 हजार परिवार प्रभावित हुए हैं। अकेले बस्तर जिले में करीब 10 हजार प्रभावित परिवारों के सामने संकट खड़ा हुआ है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए 61 राहत शिविर बनाए हैं, जबकि सुकमा में भी प्रभावित लोगों के लिए राहत व्यवस्था की गई है। कुल 65 राहत शिविरों में 8,894 लोगों के रहने की जानकारी सामने आई है।राहत शिविरों में भोजन, चाय, नाश्ता और दवाओं समेत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन की ओर से निचली बस्तियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मुख्यमंत्री साय ने जगदलपुर के निगम क्षेत्र में स्थित डोंगाघाट का भी दौरा किया। कीचड़ और पानी के बीच उन्होंने प्रभावित गलियों में पैदल चलकर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया।उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। इसके बाद सुकमा के पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी टाउन क्लब राहत शिविर पहुंचकर वहां रह रहे लोगों से भी मुलाकात की।मुख्यमंत्री ने डोंगाघाट में बाढ़ प्रभावित सुनील और कुशल के परिवारों से भी बातचीत की। अधिकारियों से राहत सामग्री और आवश्यक सेवाओं की स्थिति की जानकारी लेकर उन्होंने किसी भी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने इंद्रावती नदी पर बने नए पुल का भी निरीक्षण किया। इस दौरान नदी का पानी खतरे के निशान के आसपास बह रहा था। अधिकारियों ने उन्हें नदी के जलस्तर और निचली बस्तियों में चलाए जा रहे राहत कार्यों की जानकारी दी।कलेक्टर आकाश छिकारा और कमिश्नर डोमन सिंह ने बताया कि निचले इलाकों में राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
प्रदेश सरकार ने बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में मकान, फसल और पशुधन को हुए नुकसान का संवेदनशीलता के साथ आकलन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द सहायता दी जा सके।महानदी, शिवनाथ, इंद्रावती और खारुन समेत कई नदियों में उफान के कारण 400 से ज्यादा गांवों के प्रभावित होने की जानकारी है। कई इलाकों में धान, फल और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। अब प्रशासन इन नुकसान का आंकलन कर रहा है।बाढ़ के बाद साफ पेयजल की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं और जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मुश्किलें राहत शिविरों में भी साफ दिखाई दे रही हैं। लालबाग स्थित भगत सिंह स्कूल में करीब 275 लोगों ने शरण ली है। पानी उतरने के बाद कई परिवारों के युवा अपने घरों की स्थिति देखने के लिए वापस लौट रहे हैं।डोंगाघाट निवासी बुजुर्ग विजय का घर बाढ़ में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उनका कहना है कि पानी उतरने के बाद जब परिवार घर पहुंचा तो अधिकांश सामान बह चुका था। जो सामान बचा था, उसमें से भी कुछ चोरी हो गया।लालबहादुर शास्त्री वार्ड की बुजुर्ग सुरेखा ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य घर की स्थिति देखने गए हैं। इसी इलाके की दयमती और विमला ने बताया कि घर का सामान ही नहीं, बच्चों की किताबें और कॉपियां तक पानी में बह गईं।
चंदनीडीह बस्ती में खारुन नदी का पानी उतर चुका है, लेकिन बाढ़ के निशान अभी भी घरों में मौजूद हैं। 80 वर्षीय लोकू निषाद भीगे हुए आधार कार्ड, नोट और जरूरी कागजातों को सुखाती नजर आईं। उनके लिए ये सिर्फ कागज नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरी पहचान हैं।घर से पानी निकल गया है, लेकिन दीवारों, सामान और लोगों की जिंदगी में बाढ़ की नमी और उसकी परेशानी अब भी बनी हुई है।
कुम्हारी के पुराने पुल की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। बाढ़ के तेज बहाव में पुल का एक हिस्सा बह गया है और सड़क पर करीब दो फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग की गई है, लेकिन लोग इसके बावजूद पुल से आवाजाही कर रहे हैं।पुल के नीचे तेज बहाव और ऊपर क्षतिग्रस्त रास्ते के कारण यहां हादसे का खतरा बना हुआ है। पिछले साल भी बारिश के दौरान पुल का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। उस समय मरम्मत के नाम पर डामरीकरण किया गया था, लेकिन इस बार तेज बारिश ने पुल की स्थिति फिर सामने ला दी।
राहत शिविरों में फिलहाल प्रभावित परिवारों को भोजन, नाश्ता, चाय और दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके बावजूद लोगों की सबसे बड़ी चिंता अपने घर, जरूरी सामान, बच्चों की पढ़ाई और रोजी रोटी को लेकर है।बाढ़ का पानी भले ही कई इलाकों से उतरने लगा हो, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। प्रशासन के सामने अब राहत पहुंचाने के साथ साथ क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों और पशुधन के नुकसान का सही आकलन कर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने की बड़ी चुनौती है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में बारिश का दौर फिलहाल कमजोर पड़ गया है। अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि मंगलवार को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।सोमवार को प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क रहा। सरगुजा और बस्तर संभाग के एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश दर्ज की गई। फिलहाल प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर और ओडिशा से आने वाले पानी पर बनी हुई है।