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Hearing in Dhar Bhojshala case accelerates, ASI presents arguments in High Court
इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में बीते सोमवार से महत्वपूर्ण मोड़ आया। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने अपने तर्क प्रस्तुत करना शुरू कर दिया है।
124 वर्षों में कई बार हुआ सर्वे: एएसआइ
एएसआइ की ओर से एडिशनल सालिसिटर जनरल सुनील जैन ने कोर्ट को बताया कि पिछले 124 वर्षों में भोजशाला का कई बार सर्वेक्षण किया जा चुका है। सबसे पहला सर्वे वर्ष 1902-03 में किया गया था। इसके बाद भी विभिन्न स्तरों पर कई अन्य सर्वे हुए।
सर्वे में मिले संस्कृत श्लोक और मूर्तियां
एएसआइ ने कोर्ट को जानकारी दी कि अब तक हुए सभी सर्वेक्षणों में भोजशाला परिसर से मूर्तियां और पत्थरों पर उकेरे गए संस्कृत श्लोक मिले हैं। हाल ही में किए गए सर्वे में भी इसी प्रकार के साक्ष्य सामने आए हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
हाई कोर्ट के आदेश पर हुआ आधुनिक तकनीक से सर्वे
कोर्ट ने वर्ष 2024 में एएसआइ को अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए विस्तृत सर्वे करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के तहत एएसआइ ने 98 दिनों तक सर्वेक्षण किया और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी है।
आज पेश होंगे 98 दिन के सर्वे के निष्कर्ष
वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन मंगलवार को कोर्ट के समक्ष 98 दिनों तक चले इस सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट पर तर्क रखेंगे। वे बताएंगे कि इस दौरान भोजशाला परिसर से क्या-क्या महत्वपूर्ण तथ्य और प्रमाण प्राप्त हुए।
इतिहास से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख
सुनवाई के दौरान एएसआइ की ओर से उन ऐतिहासिक पुस्तकों और दस्तावेजों का भी हवाला दिया गया, जिनमें भोजशाला के इतिहास और महत्व का उल्लेख मिलता है।