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cg rte admission high court strict on delay
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में हो रही लेत-लतीफी पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू होने के बावजूद एडमिशन की प्रक्रिया अगस्त तक खिंचने पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग से 7 मई तक पूरी कार्ययोजना (Action Plan) मांगी है।
शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पहले चरण की लॉटरी में 15 हजार छात्रों को सीटें आवंटित की गई हैं, जिन्हें 30 मई तक प्रवेश लेना होगा। इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू होगी, जो अगस्त के मध्य तक चलेगी। इस पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा "अगर अगस्त तक केवल एडमिशन की ही प्रक्रिया चलेगी, तो बच्चे पढ़ाई कब करेंगे? विभाग ऐसी कार्ययोजना पेश करे जिससे एडमिशन जल्द से जल्द पूरे हों।"
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में पहली कक्षा के लिए कुल 38,438 आवेदन मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि नोडल वेरिफिकेशन की डेडलाइन (31 मार्च) खत्म होने के हफ्तों बाद भी 14 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। कई जिलों में तो अब तक केवल 10% आवेदनों की ही जांच हो पाई है।
प्रदेश के 6,861 निजी स्कूलों में कुल 21,698 सीटें उपलब्ध हैं। सीटों के मुकाबले आवेदनों का औसत देखा जाए तो रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे शहरों में एक-एक सीट के लिए मारामारी है। वहीं दूसरी ओर, बस्तर जैसे वनांचल क्षेत्रों के 11 जिले ऐसे हैं जहां सीटों के मुकाबले आवेदन कम आए हैं, जिससे वहां सीटें खाली रहने की संभावना है।
एडमिशन का प्रस्तावित शेड्यूल (जो विवाद की जड़ है):
प्रथम चरण प्रवेश: 1 मई से 30 मई तक।
द्वितीय चरण पंजीयन: 1 जुलाई से 11 जुलाई तक।
द्वितीय चरण लॉटरी: 27 से 31 जुलाई तक।
अंतिम दाखिला: 3 अगस्त से 17 अगस्त तक।