Hearing on Places of Worship Protection Act in Supreme Court today
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थल (संरक्षण) कानून, 1991 से संबंधित कई याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी। इस मामले में केंद्र सरकार का जवाब पूजा स्थल से जुड़े इस कानून के भविष्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में 2020 से लंबित है और इससे पहले भी कोर्ट ने केंद्र से इस पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केंद्र का जवाब आने से पहले इस मामले की आगे की सुनवाई नहीं की जा सकती। अब जबकि केंद्र सरकार का जवाब लंबित है, इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय का अगला कदम केंद्र के द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
इससे पहले, कोर्ट ने इस मामले पर 12 दिसंबर 2024 को सुनवाई की थी, जब मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने मामले पर चर्चा की थी। अब, इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता में जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ करेगी।
यह कानून 15 अगस्त 1947 तक के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने की बात करता है, जिसका उद्देश्य किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप में किसी तरह का बदलाव रोकना है। हालांकि, केंद्र सरकार को इस संबंध में कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करनी थी, लेकिन चार साल का समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं हो पाई है।
मौजूदा स्थिति में, इस मामले की दिशा और दशा केंद्र सरकार के जवाब पर निर्भर है, और यह तय करेगा कि पूजा स्थल से जुड़े कानून में कोई बदलाव होगा या नहीं। मार्च 2021 में केंद्र को इस संबंध में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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