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High Court deals a blow to the government's decision regarding CGL appointments in Jharkhand... Officers selected through the 11th to 13th JPSC exams will remain in their posts for now.
रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के एक अहम फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 से विभिन्न सेवाओं में नियुक्त अधिकारियों और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की नियुक्ति रद करने वाले सरकार के 18 अगस्त के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।जस्टिस दीपक रोशन की अदालत के आदेश के बाद संबंधित अधिकारी अपने पदों पर बने रह सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या माना कि नियुक्तियां रद करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया। अदालत ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा है कि सीआईडी जांच में आखिर ऐसा कौन सा तथ्य सामने आया था, जिसके आधार पर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई।अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि परीक्षा या चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है, यह स्पष्ट किए बिना सभी चयनित अधिकारियों की नियुक्ति खत्म करना उचित कैसे हो सकता है।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूरे मामले में जवाब मांगा है। अदालत यह भी जानना चाहती है कि सीआईडी की अब तक की जांच में क्या ठोस तथ्य सामने आए हैं और सरकार ने उन्हीं तथ्यों के आधार पर नियुक्तियां रद करने का निर्णय क्यों लिया।मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है। तब तक 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से नियुक्त अधिकारियों और एफएसओ को राहत मिली रहेगी।
इसी बीच झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा रद होने से नौकरी गंवाने वाले चयनित कर्मचारियों ने भी गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के बाहर गले में रस्सी डालकर विरोध जताया और तिरंगा यात्रा निकाली।देर रात छात्र नेताओं ने प्रेसवार्ता कर सरकार पर आंदोलन के साथ कथित तौर पर धोखा करने का आरोप लगाया।
मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए CID के एडीजी मनोज कौशिक ने 17 सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की है। अब जांच एजेंसी की रिपोर्ट और सरकार के जवाब पर पूरे विवाद की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश से JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से नियुक्त अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है, जबकि CGL से जुड़े कर्मचारियों के मामले में अलग कानूनी प्रक्रिया जारी है।