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High Court gets tough on road safety
छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने ब्लैक स्पाट सुधार कार्यों के साथ-साथ अब टोल प्लाजा पर ट्रकों की अवैध कतारों पर भी मुख्य सचिव और एनएचएआइ से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 1 सितंबर 2026 की समयसीमा तय की गई है
हाई कोर्ट ने कहा है, कि हाईवे पर बेतरतीब खड़े भारी वाहनों से दुर्घटना का खतरा रहता है। कोर्ट ने राज्य और एनएचएआइ से सुरक्षा उपायों का ब्यौरा मांगा है। रायपुर और कोरबा के बाद अब टोल प्लाजा की अव्यवस्था पर हाई कोर्ट गंभीर है।
सड़क हादसों को रोकने के लिए हाई कोर्ट की निगरानी अब केवल चिन्हित ब्लैक स्पॉट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क किनारे और टोल प्लाजा पर खड़े भारी वाहनों से दुर्घटना के खतरे को भी कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। सड़क सुरक्षा को लेकर चल रही स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट के फालोदी हादसा मामले में 13 अप्रैल 2026 को जारी अंतरिम निर्देशों का हवाला देते हुए कहा, कि छत्तीसगढ़ के टोल प्लाजा पर दोनों तरफ कैरिज-वे या पक्के शोल्डर पर ट्रकों और भारी वाहनों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं।
हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के क्षेत्रीय अधिकारी को हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी देने का निर्देश दिया है, कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का राज्य में कितना पालन हुआ है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मामले को अगली सुनवाई के लिए एक सितंबर 2026 की तारीख तय की है। छह अगस्त की सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को रायपुर के सात समेत राज्य के सभी 10 चिन्हित ब्लैक स्पाट की मौजूदा स्थिति, सुधार कार्य और शेष काम पूरा होने की समयसीमा की जानकारी देने को कहा था। इसके पालन में मुख्य सचिव ने 13 अगस्त को कोर्ट में नया शपथपत्र प्रस्तुत किया। शपथ पत्र में कहा गया है, कि रायपुर के सात ब्लैक स्पाट में प्रशासन ने तत्काल और दीर्घकालीन दोनों तरह के सुरक्षा उपाय किए हैं। शपथ पत्र में कोरबा के डूमर कछार-गजरनाला, मड़ई घाट और लगनघाट को भी ब्लैक स्पाट के रूप में चिन्हित करने की बात कही गई है। यहां रंबल स्ट्रिप, चेतावनी बोर्ड, रोड मार्किंग, ट्रांसवर्स बार, क्रास रोड साइन, सोलर ब्लिंकर और रोड स्टड लगाए गए हैं। इसके अलावा मड़ई घाट पर स्पीड लिमिट और गो स्लो बोर्ड लगाए गए हैं। वहीं, दो लेन सड़क को चार लेन में बदलने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा सरगुजा में हाल के हादसों को लेकर राज्य ने रिपोर्ट पेश की। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता, अंबिकापुर की रिपोर्ट के अनुसार जून से अगस्त 2026 के बीच हुए कुछ हादसों के पीछे निर्धारित गति सीमा की अनदेखी और तेज व लापरवाही से वाहन चलाना प्रमुख कारण बताए गए हैं।
आपको बता दें, कि कोर्ट कमिश्नर अपूर्व त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की ओर कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाए तो सड़क हादसों में कमी लाई जा सकती है। इस मामले में हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और एनएचएआइ के क्षेत्रीय अधिकारी से अलग-अलग शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।