

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Latest News: High Court strict on investigation of Rahul Gandhi's properties, seeks progress report from CBI and ED
नई दिल्ली। राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों पर इलाहबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को जांच के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की पीठ ने कहा है कि Central Bureau of Investigation (सीबीआइ) और Enforcement Directorate (ईडी) अगली सुनवाई 20 जुलाई को जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
भाजपा कार्यकर्ता की याचिका पर हुई सुनवाई
यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी की आय का कोई स्पष्ट ज्ञात स्रोत नहीं है, इसलिए उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच कराई जानी चाहिए। मामले की सुनवाई 12 मई को कोर्ट के चैंबर में हुई थी, जबकि आदेश गुरुवार को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
कोर्ट ने क्या कहा
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यदि याची की शिकायत संबंधित एजेंसियों को प्राप्त हुई है तो आरोपों का विधि के अनुसार सत्यापन किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीआइ और ईडी कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। कोर्ट ने कहा कि एजेंसियां आरोपों की जांच कर उनकी प्रगति से अदालत को अवगत कराएं।
कई केंद्रीय विभागों को भी नोटिस
अदालत ने केवल सीबीआइ और ईडी ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के कई विभागों को भी नोटिस जारी किया है। इनमें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), वित्त मंत्रालय का राजस्व विभाग, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय तथा गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) शामिल हैं। इन सभी विभागों को आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
सीबीआइ और ईडी ने शिकायत मिलने की पुष्टि की
सुनवाई के दौरान सीबीआइ ने अदालत को बताया कि उसे याची की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और वह आठ सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करेगी। वहीं ईडी ने भी शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपों का परीक्षण किया जाएगा और उसकी प्रगति रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाएगी।
याचिका की वैधता पर बाद में होगा फैसला
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय सभी पक्षों के जवाब और प्रत्युत्तर हलफनामे आने के बाद लिया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने अपने वरिष्ठ रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि याची द्वारा प्रस्तुत पेपर-बुक और अन्य दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाए।