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High Court takes a stern view of the complaint against IPS Ratanlal Dangi; seeks a response from Police Headquarters and the Home Department.
बिलासपुर। आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ पीड़िता की शिकायत और जांच प्रक्रिया को लेकर दायर रिट याचिका पर बुधवार, 12 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में सुनवाई हुई। मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस मुख्यालय रायपुर और गृह विभाग के सचिव को तत्काल जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 वाले सप्ताह में होगी।
याचिका के अनुसार, कथित प्रताड़ना से परेशान पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष उपस्थित होकर आईपीएस रतनलाल डांगी के खिलाफ शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में छत्तीसगढ़ और राजस्थान में डांगी से जुड़ी होने का आरोप लगाई गई कई संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया था।
याचिका में रायपुर के धरमपुरा, राजिम, कटघोरा में करीब 23 एकड़ जमीन, बिलासपुर की पाल्मसिटी कॉलोनी के अलावा राजस्थान के नागौर, मकराना, डीडवाना, जयपुर, बीकानेर समेत अन्य स्थानों पर कथित संपत्तियों का जिक्र किया गया है।
शिकायत के बाद अक्टूबर 2025 में डीजीपी की ओर से मामले की जांच के लिए आईजीपी आनंद छाबड़ा को जांच अधिकारी और डीआईजीपी मिलना कुर्रे को सहायक जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने की बात याचिका में कही गई है।
याचिका में यह भी उल्लेख है कि इसी अवधि में गृह विभाग के सचिव की ओर से आईपीएस रतनलाल डांगी को निलंबित किया गया था। हालांकि, पीड़िता ने जांच प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने हाईकोर्ट में पक्ष रखते हुए जांच अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। याचिका के अनुसार, अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच डीआईजीपी मिलना कुर्रे रतनलाल डांगी से एक रैंक नीचे के पद पर पदस्थ थीं। वहीं, आईजीपी आनंद छाबड़ा उसी अवधि में रतनलाल डांगी के समान रैंक पर पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ थे।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि दोनों अधिकारियों की ओर से की जा रही जांच निष्पक्ष नहीं है और जांच अधिकारी उसके प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्य कर रहे हैं।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि निलंबन की तारीख से 90 दिनों के भीतर रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप पत्र जारी नहीं किया गया। पीड़िता ने इसी आधार पर जांच प्रक्रिया और अब तक की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
पीड़िता ने केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के समक्ष आपत्ति आवेदन प्रस्तुत कर दोनों आईपीएस अधिकारियों को जांच से हटाने की मांग की थी। साथ ही मामले की जांच किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और महिला आईएएस अधिकारी से कराने का अनुरोध किया गया था। याचिका के मुताबिक, इन आवेदनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद पीड़िता ने हाईकोर्ट की शरण ली।
12 अगस्त की सुनवाई में हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय रायपुर और गृह विभाग के सचिव से जवाब मांगा है। अब सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 वाले सप्ताह में होगी।