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Honey Bagga steals a march before the elections; becomes Youth Congress State Vice-President unopposed.
रायपुर। छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव के बीच बड़ा उलटफेर सामने आया है। प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव का परिणाम आने से पहले ही हनी परस्मीत सिंह बग्गा निर्विरोध प्रदेश उपाध्यक्ष निर्वाचित हो गए हैं। बग्गा को पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल का करीबी माना जाता है। ऐसे में उनका निर्विरोध निर्वाचन युवा कांग्रेस के भीतर एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
देवेंद्र यादव खेमे को झटका?
हनी बग्गा के निर्विरोध प्रदेश उपाध्यक्ष चुने जाने को विधायक देवेंद्र यादव के खेमे के लिए झटके के तौर पर भी देखा जा रहा है। वहीं, भूपेश बघेल समर्थकों में इस चुनाव को लेकर उत्साह बढ़ा है।
बताया गया है कि अल्पसंख्यक समाज के लिए निर्धारित श्रेणी में हनी परस्मीत सिंह बग्गा और गुलजैब अहमद ने प्रदेश उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। नामांकन की जांच के दौरान गुलजैब अहमद का आवेदन निर्धारित आयु सीमा से अधिक होने के कारण निरस्त कर दिया गया। इसके बाद मैदान में अकेले रह गए हनी बग्गा को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
अध्यक्ष पद की दौड़ में अब 18 दावेदार
युवा कांग्रेस के विभिन्न पदों के लिए 30 अगस्त से ऑनलाइन मतदान शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कुल 19 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। जांच प्रक्रिया के दौरान अधिक आयु के कारण आदित्य भगत का नामांकन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद अब प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में 18 प्रत्याशी मैदान में हैं।
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए मुख्य मुकाबला शैलेन्द्र बंजारे और सत्येंद्र चेलक के बीच माना जा रहा है। हालांकि चुनाव परिणाम ऑनलाइन मतदान पूरा होने के बाद सामने आएगा।
बग्गा की जीत से समर्थकों में उत्साह
युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हनी परस्मीत सिंह बग्गा के निर्विरोध निर्वाचन को लेकर चर्चा तेज है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हनी बग्गा पहले से ही प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में सक्रिय थे। अब प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में उनका निर्वाचन संगठन में उनकी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
निर्विरोध निर्वाचन के बाद हनी बग्गा ने भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, राष्ट्रीय नेतृत्व और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रति आभार जताया है। राजनीतिक तौर पर देखें तो युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में यह घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर अलग-अलग खेमों की सक्रियता और आगामी संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।