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Hypersonic glide and cruise missiles will soon be included in the army fleet, DRDO has increased preparations.
नई दिल्ली। भारत बदलती युद्ध रणनीतियों और आधुनिक सैन्य चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख समीर वी. कामत ने एक कार्यक्रम में जानकारी दी कि देश जल्द ही हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल जैसी उन्नत प्रणालियों से लैस होगा।
इन मिसाइलों की गति मौजूदा सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल से लगभग दोगुनी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, उनकी अत्यधिक रफ्तार और दिशा बदलने की क्षमता के कारण दुनिया के अधिकांश मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम इन्हें रोक पाने में सक्षम नहीं होंगे।
ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण जल्द संभव
डीआरडीओ प्रमुख ने बताया कि हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का पहला परीक्षण जल्द किया जा सकता है। इसके साथ ही स्क्रैमजेट इंजन आधारित हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम में भी बड़ी सफलता मिली है।
हाल ही में स्वदेशी स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम का 1,000 सेकंड से अधिक समय तक सफल परीक्षण किया गया है। डीआरडीओ का लक्ष्य है कि सरकार से औपचारिक मंजूरी मिलने के पांच वर्षों के भीतर इस प्रणाली को भारतीय सेना के बेड़े में शामिल कर लिया जाए।
ब्रह्मोस से भी तेज़ एंटी-शिप मिसाइल पर काम
भारत एक नई पीढ़ी की एंटी-शिप मिसाइल भी विकसित कर रहा है, जिसकी गति ब्रह्मोस मिसाइल से अधिक होगी। बताया जा रहा है कि इस परियोजना के तीसरे चरण का परीक्षण इसी महीने प्रस्तावित है। यह मिसाइल समुद्री युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगी।
चीन और रूस पहले से आगे
हाइपरसोनिक तकनीक के क्षेत्र में फिलहाल रूस और चीन अग्रणी माने जाते हैं। रूस के पास ‘जिरकॉन’ और ‘किंजल’ जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं, जबकि चीन की ‘डीएफ-जेडएफ’ प्रणाली पहले ही तैनात की जा चुकी है।
वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका इस तकनीक में अपेक्षाकृत पीछे माना जा रहा है। अमेरिका के कई हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट, जैसे एजीएम-183 एआरआरडब्ल्यू, हाल के वर्षों में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं।

अग्नि-6 कार्यक्रम को मंजूरी का इंतजार
डीआरडीओ प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘अग्नि-6’ मिसाइल कार्यक्रम के लिए तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सरकार की मंजूरी मिलते ही इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
अग्नि-6 को अग्नि श्रृंखला की सबसे आधुनिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) माना जा रहा है। इसकी अनुमानित मारक क्षमता 10,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है। यह मिसाइल एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने और अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम होगी, जिससे भारत की सामरिक शक्ति में बड़ा इजाफा होगा।