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India Top 300 Family Businesses
नई दिल्ली। भारत के बड़े कारोबारी परिवारों की संपत्ति में लगातार इजाफा हो रहा है। 2026 Barclays Private Clients Hurun India Most Valuable Family Businesses List के मुताबिक देश के टॉप 300 फैमिली बिजनेस की कुल वैल्यू करीब ₹138 लाख करोड़ (1.46 ट्रिलियन डॉलर) पहुंच गई है। यह आंकड़ा दुनिया की 18वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के आकार के बराबर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 की तुलना में इन परिवारों की संयुक्त संपत्ति में करीब ₹30 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। यानी पिछले दो वर्षों में इन बिजनेस घरानों ने औसतन करीब ₹4,076 करोड़ प्रतिदिन की वैल्यू जोड़ी है।
अंबानी परिवार सबसे ऊपर
रैंकिंग में अंबानी परिवार लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े अंबानी परिवार की कुल वैल्यू करीब ₹25.83 लाख करोड़ आंकी गई है। हालांकि पिछले साल की तुलना में इसमें गिरावट दर्ज की गई है।
दूसरे स्थान पर कुमार मंगलम बिड़ला परिवार है, जिसकी संपत्ति करीब ₹8.14 लाख करोड़ है। बिड़ला परिवार की वैल्यू में करीब 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जिंदल परिवार करीब ₹8.02 लाख करोड़ की वैल्यू के साथ तीसरे स्थान पर है। इसकी संपत्ति में लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं बजाज परिवार ₹7.70 लाख करोड़ के साथ चौथे और महिंद्रा परिवार ₹5.15 लाख करोड़ के साथ पांचवें स्थान पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक टॉप तीन परिवारों—अंबानी, बिड़ला और जिंदल—की संयुक्त वैल्यू करीब ₹42 लाख करोड़ है, जो भारत की कुल लिस्टेड मार्केट कैपिटलाइजेशन का लगभग 9 प्रतिशत है।
अनिल अग्रवाल की संपत्ति में 212% की छलांग
इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा अनिल अग्रवाल परिवार की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी की है। वेदांता से जुड़े अनिल अग्रवाल परिवार की संपत्ति में पिछले तीन वर्षों में करीब 212 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
2026 की सूची में अनिल अग्रवाल परिवार की वैल्यू करीब ₹4.45 लाख करोड़ बताई गई है। वेदांता की पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में संरचनात्मक बदलाव के बाद परिवार की वैल्यू में बड़ी बढ़ोतरी हुई। तीन साल की अवधि में परिवार ने करीब ₹3.03 लाख करोड़ की वैल्यू जोड़ी है।
टॉप 10 में कौन-कौन?
टॉप 10 सबसे मूल्यवान फैमिली बिजनेस में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—
1. अंबानी परिवार – ₹25.83 लाख करोड़
2. कुमार मंगलम बिड़ला परिवार – ₹8.14 लाख करोड़
3. जिंदल परिवार – ₹8.02 लाख करोड़
4. बजाज परिवार – ₹7.70 लाख करोड़
5. महिंद्रा परिवार – ₹5.15 लाख करोड़
6. अनिल अग्रवाल परिवार – ₹4.45 लाख करोड़
7. मुंगरमा परिवार – ₹3.06 लाख करोड़
8. नाडार परिवार – ₹2.91 लाख करोड़
9. प्रेमजी परिवार – ₹2.72 लाख करोड़
10. दानी परिवार – ₹2.48 लाख करोड़
रिपोर्ट के अनुसार टॉप 10 परिवारों के पास 300 परिवारों की कुल संपत्ति का करीब 51 प्रतिशत हिस्सा है।
नाडार परिवार को बड़ा झटका
जहां कई कारोबारी परिवारों की संपत्ति तेजी से बढ़ी, वहीं नाडार परिवार की संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई। एचसीएल टेक्नोलॉजीज से जुड़े नाडार परिवार की संपत्ति में पिछले तीन वर्षों में करीब 32 प्रतिशत की कमी आई है।
रिपोर्ट के अनुसार नाडार परिवार की वैल्यू करीब ₹2.91 लाख करोड़ रह गई है। तीन साल की अवधि में परिवार की संपत्ति में करीब ₹1.39 लाख करोड़ की कमी बताई गई है। गिरावट के मामले में नाडार परिवार इस सूची में सबसे ऊपर रहा।
इसके बाद राजीव सिंह परिवार की संपत्ति में करीब 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
230 परिवारों के पास 1 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति
रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा यह है कि अब 230 भारतीय फैमिली बिजनेस ऐसे हैं, जिनकी कुल संपत्ति कम से कम 1 अरब डॉलर है। पिछले साल के मुकाबले ऐसे परिवारों की संख्या में करीब 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पारिवारिक कारोबारों के लिए अब उत्तराधिकार, कॉरपोरेट गवर्नेंस, फैमिली ऑफिस, लिक्विडिटी मैनेजमेंट और वैश्विक स्तर पर कारोबार के विस्तार जैसे मुद्दे पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।
मुंबई बना फैमिली बिजनेस का सबसे बड़ा केंद्र
देश के बड़े पारिवारिक कारोबारों का सबसे बड़ा केंद्र मुंबई है। रिपोर्ट में शामिल कारोबारों में से करीब 95 कंपनियों का मुख्यालय मुंबई में है। इसके बाद एनसीआर में 58 और कोलकाता में 26 कंपनियां हैं।
कुल मिलाकर 300 फैमिली बिजनेस की सूची में देश के 45 शहरों को शामिल किया गया है। इससे यह भी पता चलता है कि भारत में पारिवारिक कारोबार अब कुछ चुनिंदा औद्योगिक शहरों तक सीमित नहीं रह गए हैं।
कौन से सेक्टर बना रहे हैं सबसे ज्यादा दौलत?
रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सेक्टर में सबसे ज्यादा 47 फैमिली बिजनेस शामिल हैं। इसके बाद ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स तथा केमिकल्स सेक्टर में 31-31 कारोबारी परिवार हैं।
हालांकि औसत वैल्यू के मामले में मेटल्स और माइनिंग सेक्टर सबसे आगे है। इस सेक्टर के फैमिली बिजनेस की औसत वैल्यू करीब ₹84,019 करोड़ बताई गई है।
पहली पीढ़ी के बिजनेस में फार्मास्युटिकल सेक्टर भी तेजी से उभर रहा है। इस श्रेणी में 22 कंपनियां शामिल हैं और इनकी औसत वैल्यू करीब ₹74,218 करोड़ है।
फैमिली बिजनेस का रोजगार और टैक्स में भी बड़ा योगदान
इन 300 फैमिली बिजनेस का प्रभाव सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक ये कारोबारी समूह मिलकर 54 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं। इनका कुल राजस्व करीब ₹56 लाख करोड़ और नेट प्रॉफिट करीब ₹5.6 लाख करोड़ बताया गया है।
इन कारोबारों का कुल नेट मार्जिन लगभग 10 प्रतिशत है। साथ ही इन परिवारों से जुड़े कारोबारों ने करीब ₹1.9 लाख करोड़ टैक्स का योगदान दिया, जो भारत के कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन का लगभग 17 प्रतिशत बताया गया है।
नई पीढ़ी के कारोबारी भी तेजी से बढ़ रहे
रिपोर्ट में पहली पीढ़ी के 100 पारिवारिक व्यवसायों की अलग रैंकिंग भी की गई है। इनकी कुल वैल्यू करीब ₹77.8 लाख करोड़ बताई गई है। पहली पीढ़ी के कारोबारों में अडानी परिवार करीब ₹19.6 लाख करोड़ की वैल्यू के साथ सबसे आगे है।
इसके बाद भारती एयरटेल से जुड़े सुनील भारती मित्तल परिवार और सन फार्मास्युटिकल्स से जुड़े दिलीप सांघवी परिवार का स्थान है। इससे संकेत मिलता है कि भारत में नई संपत्ति का निर्माण अब सिर्फ पुराने कारोबारी घरानों तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी के उद्यमी भी तेजी से बड़े कारोबारी समूह खड़े कर रहे हैं।
महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी
फैमिली बिजनेस में महिलाओं की नेतृत्व भूमिका अभी सीमित है, लेकिन इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। सूची में 18 ऐसे कारोबारी समूह शामिल हैं, जिनका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।
हिंदुस्तान जिंक से जुड़ी प्रिया अग्रवाल हेब्बार और एचसीएल टेक्नोलॉजीज से जुड़ी रोशनी नाडर मल्होत्रा जैसे नाम इस सूची में प्रमुख हैं। वहीं फाल्गुनी नायर पहली पीढ़ी के बिजनेस का नेतृत्व करने वाली प्रमुख महिला उद्यमियों में शामिल हैं।
कुल मिलाकर, 2026 की फैमिली बिजनेस रैंकिंग भारत की अर्थव्यवस्था में पारिवारिक कारोबारों के बढ़ते प्रभाव को दिखाती है। अंबानी परिवार का कुल संपत्ति के मामले में दबदबा बरकरार है, लेकिन अनिल अग्रवाल परिवार की तेज वृद्धि और नाडार परिवार की गिरावट ने इस साल की रैंकिंग को खास बना दिया है। वहीं नई पीढ़ी के अरबपति परिवारों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि भारत में संपत्ति निर्माण का दायरा लगातार विस्तार कर रहा है।